
आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा आज अपने अंतिम पड़ाव पर आ गया है। आज यानी मंगलवार, 28अक्टूबर2025,छठ पूजा का चौथा और सबसे महत्वपूर्ण दिन है। आज सुबह उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देने के साथ ही चार दिनों तक चलने वाला यह पावन पर्व संपन्न हो जाएगा।इसी के साथ,छठ व्रतियों की36घंटे लंबी,कठिन और निर्जला तपस्या भी पूरी होगी। छठ के व्रत को हिंदू धर्म के सबसे मुश्किल व्रतों में से एक माना जाता है,जिसमें व्रती न कुछ खाते हैं और न ही जल की एक बूँद ग्रहण करते हैं। खरना के दिन सूर्यास्त के बाद प्रसाद ग्रहण करने के बाद से शुरू हुआ यह व्रत,आज भोर में सूर्य की पहली किरण के साथ समाप्त होगा।आइए,जानते हैं इस व्रत के पारण की सही विधि,नियम और उगते सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व।छठ पूजा2025:चौथा और अंतिम दिनतारीख: 28अक्टूबर,दिन मंगलवारउषा अर्घ्य का शुभ मुहूर्त:सुबह6:30बजे (यह समय दिल्ली के अनुसार है,आपके शहर में इसमें मामूली अंतर हो सकता है)सुबह के अर्घ्य की सरल विधि (प्रातः अर्घ्य)सुबह भोर होने से पहले ही व्रती अपने पूरे परिवार के साथ छठ घाट पर पहुँच जाते हैं।किसी तालाब या नदी के पानी में खड़े होकर उगते सूर्यदेव की प्रतीक्षा की जाती है। इस दौरान हमन सूप को फिर से फलों और प्रसाद से सजाया जाता है, जिससे शाम को अर्घ्य दिया जाता है।जैसे ही पूर्व दिशा में सूर्य की पहली लालिमा दिखतीਹੈऔर सूर्य देव उदय होते हैं,उन्हें दूध और जल से अर्घ्य दिया जाता है।सूर्य देव का ध्यान करते हुए प्रार्थना करें और छठी मइया का धन्यवाद करें कि उन्होंने इस व्रत को पूरा करने की शक्ति दी।अर्घ्य देने के बाद,व्रती घाट पर ही मौजूद लोगों में प्रसाद बांटते हैं और फिर अपने व्रत को खोलने (पारण) की तैयारी करते हैं।क्यों ख़ास है उगते सूरज को अर्घ्य देना?छठ पूजा में डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर उनकी पूजा की जाती है, लेकिन चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देना एक नई शुरुआत, आशा और सकारात्मकता का प्रतीक है। यह जीवन में एक नए सवेरे का संकेत है। श्रद्धालुओं का मानना है कि उगते सूर्य को अर्घ्य देने से सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और लंबी आयु का वरदान मिलता है। उगते सूर्य की सुनहरी किरणें जब व्रती के शरीर पर पड़ती हैं, तो यह एक नए जीवन की ऊर्जा प्रदान करती हैं।36घंटे बाद ऐसे खोलें अपना व्रत (पारण विधि)28अक्टूबर को सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती किसी भी समय अपने व्रत का पारण कर सकते हैं।36घंटों के बिना पानी के उपवास के बाद यह पल बहुत ही ख़ास और भावुक होता है। ज़्यादातर व्रती शाम के अर्घ्य के बाद सोते नहीं हैं और पूरी रात जागकर भजन-कीर्तन करते हैं। सुबह अर्घ्य देने के बाद वे अपने व्रत को पूरा करते हैं।सही तरीका:व्रत का पारण पूजा के बाद कच्चे दूध का शरबत पीकर या ठेकुआ खाकर किया जा सकता है। कुछ महिलाएं घाट से घर लौटकर,पूजा स्थान पर दीया जलाकर,छठी मइया को प्रणाम करती हैं और फिर परिवार के साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करके अपना व्रत खोलती हैं।इन चीज़ों से करें व्रत का पारणपरंपरा के अनुसार,छठ व्रत का पारण सबसे पहले थोड़ा सा प्रसाद खाकर किया जाता है। इसमें आप ठेकुआ,कसारी (चावल के लड्डू),गुड़ और चावल की खीर,या कोई फल खा सकते हैं। कुछ जगहों पर व्रती तुलसी के पत्ते के साथ जल ग्रहण करते हैं और फिर छठी मइया को नमस्कार करके अपना व्रत पूरा करते हैं।
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