
News India Live, Digital Desk: भारत में दुर्गा पूजा का पर्व जितने भव्य तरीके से मनाया जाता है, उतना ही महत्व देवी के एक और स्वरूप की पूजा का है, जिन्हें ‘जगद्धात्री’ के नाम से जाना जाता है. ‘जगद्धात्री’ का शाब्दिक अर्थ है ‘जगत को धारण करने वाली’ या ‘पूरे संसार की रक्षा करने वाली’. यह पूजा मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में दुर्गा पूजा के ठीक एक महीने बाद, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है.साल 2025 में जगद्धात्री पूजा का यह पावन पर्व 31 अक्टूबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा, जो अक्षय नवमी के दिन पड़ रहा है.देवी जगद्धात्री का स्वरूप कैसा है?मां जगद्धात्री, मां दुर्गा का ही एक शांत और सौम्य स्वरूप हैं. जहां मां दुर्गा महिषासुर का वध करती हुई रौद्र रूप में दिखती हैं, वहीं मां जगद्धात्री का स्वरूप सत्वगुण यानी शांति, धैर्य और दिव्यता का प्रतीक है. वह सिंह पर विराजमान होती हैं, और उनके चार हाथ हैं जिनमें वे शंख, चक्र, धनुष और बाण धारण करती हैं. उनके सिंह के नीचे एक हाथी लेटा होता है, जो अहंकार के प्रतीक राक्षस ‘करिंद्रासुर’ का शव माना जाता है. यह दृश्य अहंकार पर ज्ञान और दिव्यता की विजय को दर्शाता है.क्यों की जाती है जगद्धात्री की पूजा? पढ़ें पौराणिक कथाइस पूजा की शुरुआत से जुड़ी दो मुख्य कथाएं प्रचलित हैं:देवताओं का अहंकार नष्ट करना: केन उपनिषद और तंत्रों में वर्णित कथा के अनुसार, महिषासुर पर विजय प्राप्त करने के बाद देवताओं को अपनी शक्ति पर घमंड हो गया था. वे यह भूल गए कि उनकी शक्ति का स्रोत स्वयं आदिशक्ति हैं. उनके इस अहंकार को तोड़ने के लिए देवी एक यक्ष के रूप में प्रकट हुईं और उनके सामने घास का एक तिनका रखकर उसे अपनी-अपनी शक्ति से हिलाने की चुनौती दी. कोई भी देवता उस तिनके को हिला तक नहीं सका. तब उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और देवी उनके समक्ष जगद्धात्री के रूप में प्रकट हुईं.राजा कृष्णचंद्र द्वारा शुरुआत: बंगाल में इस पूजा को एक बड़े उत्सव के रूप में स्थापित करने का श्रेय नादिया के महाराजा कृष्णचंद्र को दिया जाता है. कहा जाता है कि 18वीं सदी में वे किसी कारणवश दुर्गा पूजा नहीं कर पाए थे, जिससे वे बहुत दुखी थे. तब देवी ने उन्हें सपने में दर्शन देकर कार्तिक मास की शुक्ल नवमी को अपने ‘जगद्धात्री’ स्वरूप की पूजा करने का आदेश दिया. राजा ने ऐसा ही किया, और तब से यह पूजा बंगाल में धूमधाम से मनाई जाने लगी.जगद्धात्री पूजा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त (Jagaddhatri Puja 2025 Date and Timings)पूजा की मुख्य तिथि: 31 अक्टूबर 2025, शुक्रवारनवमी तिथि का आरंभ: 30 अक्टूबर 2025, को सुबह 10:06 बजे से.नवमी तिथि का समापन: 31 अक्टूबर 2025, को सुबह 10:03 बजे पर.पूजा की सरल विधि (Simple Puja Vidhi)जगद्धात्री पूजा के कई अनुष्ठान दुर्गा पूजा के समान ही होते हैं. घर पर आप इसे इस सरल विधि से कर सकते हैं:सुबह जल्दी स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.पूजा स्थल पर मां जगद्धात्री की मूर्ति या तस्वीर एक चौकी पर स्थापित करें.देवी को लाल वस्त्र, लाल फूल और श्रृंगार का सामान अर्पित करें.चंदन, फल, मिठाई और दूर्वा चढ़ाएं.घी का दीपक और धूप जलाकर मां की आरती करें और उनके मंत्रों का जाप करें.पूजा के बाद प्रसाद सभी में वितरित करें.यह पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह संदेश देती है कि जीवन में सच्ची शक्ति, अहंकार को त्याग कर विनम्रता और धर्म के मार्ग पर चलने से ही प्राप्त होती है.
UK News