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सच सामने आ गया है, तो दिक्कत क्यों? -The Taj Story पर हुए केस को लेकर परेश रावल ने तोड़ीचुप्पी:

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दिग्गज अभिनेता और सांसद परेश रावल अपनी आने वाली फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ (The Taj Story) को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं यह फिल्म घोषणा के समय से ही विवादों में घिर गई है, क्योंकि इसका विषय ताजमहल के इतिहास से जुड़ा है, जिसे लेकर कई तरह की मान्यताएं और विवाद मौजूद हैं। हाल ही में इस फिल्म के खिलाफ कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया है कि यह फिल्म एक समुदाय विशेष की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकती है और समाज में नफरत फैला सकती है।

अब इस पूरे मामले पर फिल्म के मुख्य अभिनेता परेश रावल ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने फिल्म का पुरजोर बचाव करते हुए कहा है कि उनकी फिल्म सिर्फ सच्चाई बयां करती है और इसका मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है।

क्या कहा परेश रावल ने?

एक हालिया इंटरव्यू में जब परेश रावल से फिल्म के खिलाफ हुए कोर्ट केस के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मैं इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकता क्योंकि मामला अभी अदालत में है। लेकिन मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि हमने तथ्यों के आधार पर एक कहानी बनाई है। जब सच सामने आता है, तो कुछ लोगों को इससे दिक्कत होती है।”

उन्होंने आगे कहा कि फिल्म में किसी भी तरह से किसी की धार्मिक भावनाओं को निशाना नहीं बनाया गया है। “हमारी मंशा बिल्कुल साफ है हम सिर्फ एक कहानी बताना चाहते हैं, उस पहलू को दिखाना चाहते हैं जिसके बारे में बहुत कम बात की गई है। मुझे पूरा यकीन है कि जब लोग फिल्म देखेंगे तो वे खुद समझ जाएंगे कि हमारा इरादा क्या था।”

क्या है पूरा विवाद?

‘द ताज स्टोरी’ फिल्म का निर्माण विवेक रंजन अग्निहोत्री की’आई एम बुद्ध’ प्रोडक्शन कंपनी कर रही है इस फिल्म का उद्देश्य ताजमहल से जुड़ी उन थ्योरीज और कहानियों को explorar करना है जो मानती हैं कि ताजमहल असल में एक मकबरा नहीं, बल्कि एक शिव मंदिर ‘तेजो महालय’ था।

इसी विषय को लेकर कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई है और अदालत में याचिका दायर कर कहा है कि यह फिल्म ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ करती है और देश का सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ सकती है। याचिका में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई है।

परेश रावल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ‘The Kerala Story’ और ‘The Kashmir Files’ जैसीफिल्मों के बाद ऐतिहासिक और सामाजिक मुद्दों पर बनने वाली फिल्मों को लेकर बहस तेज हो गई है। अब देखना यह होगा कि अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है और ‘द ताज स्टोरी’ दर्शकों तक पहुंच पाती है या नहीं।

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