
व्रत-त्योहारों से भरपूर कार्तिक का पावन महीना अब अपने समापन की ओर है। कार्तिक पूर्णिमा के साथ ही यह महीना खत्म हो जाएगा और इसके ठीक अगले दिन यानी6नवंबर2025सेएक और पवित्र महीने की शुरुआत होगी,जिसका नाम हैमार्गशीर्ष। कई लोग इसे’अगहन’के नाम से भी जानते हैं।हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष महीने का बहुत विशेष स्थान है। यह महीना इतना शुभ माना जाता है कि कार्तिक में रुके हुए सभी मांगलिक कार्य जैसे शादी-ब्याह,गृह प्रवेश आदि इसी महीने से दोबारा शुरू हो जाते हैं। लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत जुड़ी है हम सबके आंगन में मौजूदतुलसी के पौधेसे।मार्गशीर्ष और तुलसी का क्या है कनेक्शन?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,तुलसी जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही हुआ थाऔर मार्गशीर्ष का महीना उन्हें अत्यंत प्रिय है। तुलसी को कोई साधारण पौधा नहीं,बल्किस्वयं माता लक्ष्मी का स्वरूपमाना गया है। यही वजह है कि मार्गशीर्ष (अगहन) के महीने में विधि-विधान से तुलसी पूजन करने का फल कई गुना बढ़ जाता है।देवघर बैद्यनाथ धाम के पुरोहित प्रमोद श्रृंगारी बताते हैं कि इस महीने में जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा से तुलसी की पूजा करता है,उसे जीवन में कभी भी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता और धन लाभ के नए-नए रास्ते खुलते हैं।इस महीने में कैसे करें तुलसी पूजन ताकि मिले पूरा फल?मार्गशीर्ष में तुलसी पूजन की विधि थोड़ी अलग और विशेष है। आप इन आसान तरीकों से माता तुलसी और लक्ष्मी जी की कृपा पा सकते हैं:जल के साथ कच्चा दूध चढ़ाएं:इस महीने में रोज़ सुबह तुलसी जी को जल तो अर्पित करें ही,साथ में थोड़ा सा कच्चा दूध भी चढ़ाएं। यह उपाय बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है।शाम को जलाएं गाय के घी का दीया:मार्गशीर्ष की हर शाम को तुलसी के पौधे के पास गाय के शुद्ध घी का दीपक ज़रूर जलाएं। माना जाता है कि ऐसा करने से घर के सभी दुख-दर्द और नकारात्मकता का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।भगवान सत्यनारायण को अर्पित करें तुलसी की मंजरी:अगर आप इस महीने भगवान सत्यनारायण की कथा सुनते हैं या पूजा करते हैं,तो प्रसाद में तुलसी की मंजरी (तुलसी के बीज) ज़रूर चढ़ाएं। यह छोटा सा उपाय घर में हमेशा बरकत बनाए रखता है।तो इस मार्गशीर्ष,इन आसान नियमों का पालन करें और देखें कि कैसे आपके घर में सुख,शांति और समृद्धि का वास होता है और आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।डिस्क्लेमर:यह लेख सामान्य जानकारियों और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। यह किसी भी बात की सटीकता का दावा नहीं करता है। किसी भी जानकारी को व्यक्तिगत रूप से अमल में लाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
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