
News India Live, Digital Desk: Kaal Bhairav Puja Rituals : हिंदू धर्म में भगवान कालभैरव को भगवान शिव का एक बहुत ही शक्तिशाली और रौद्र स्वरूप माना जाता है. इन्हें ‘काशी का कोतवाल’ भी कहा जाता है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि वाराणसी (काशी) में रहने वाले हर व्यक्ति पर उनकी नजर रहती है और उनकी इजाजत के बिना वहां कुछ भी नहीं होता.कालभैरव का नाम सुनने में भले ही भयानक लगे, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए बहुत दयालु हैं. ‘काल’ का अर्थ है समय और मृत्यु, और ‘भैरव’ का अर्थ है भय को हरने वाले. यानी, जो समय और मृत्यु के भय से भी हमें मुक्त कर दें, वही कालभैरव हैं. जो भी भक्त सच्चे मन से उनकी पूजा और आरती करता है, उसके जीवन से हर तरह का डर, संकट और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है.खासकर शनि, राहु और केतु जैसे ग्रहों के बुरे प्रभाव से बचने के लिए भी बाबा भैरव की पूजा बहुत फलदायी मानी जाती है.क्यों की जाती है कालभैरव की आरती?जिस तरह हम भगवान को प्रसन्न करने के लिए भजन गाते हैं और मंत्रों का जाप करते हैं, उसी तरह आरती भी अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करने का एक बहुत सरल और सुंदर तरीका है. कालभैरव जी की आरती “जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा” गाने से मन को एक अद्भुत शांति मिलती है.इस आरती में उनके स्वरूप, उनकी शक्तियों और उनकी महिमा का गुणगान किया गया है. जब भक्त मिलकर इस आरती को गाते हैं, तो एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है जो आसपास की सभी नकारात्मक शक्तियों को नष्ट कर देती है. यह आरती हमें यह याद दिलाती है कि भले ही जीवन में कितनी भी मुश्किलें क्यों न हों, बाबा भैरव हमेशा हमारी रक्षा के लिए मौजूद हैं.अगर आपके मन में किसी तरह का अनजाना डर है, कोई काम बनते-बनते बिगड़ जाता है या आप अपने दुश्मनों से परेशान हैं, तो आपको हर दिन या विशेष रूप से हर रविवार और अष्टमी तिथि को कालभैरव की आरती जरूर करनी चाहिए. यह आपके जीवन में एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है और आपको हर मुसीबत से बचाती है.”जय भैरव देवा” आरतीजय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा,सुर-नर-मुनि सब करते, प्रभु तुम्हरी सेवा।।(…और आगे की पंक्तियाँ)यह आरती भगवान कालभैरव के प्रति हमारी भक्ति और विश्वास को मजबूत करती है और हमें निर्भय होकर जीवन जीने की प्रेरणा देती है.
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