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दिल्ली का दम घुट रहा, हवा ‘गंभीर’! जानें आज सांस लेना कितना खतरनाक और क्यों चुप है सरकार

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली वालों के लिए रविवार की सुबह एक बार फिर घने,जहरीले कोहरे और आंखों में जलन के साथ हुई। शहर की हवा इतनी खराब हो चुकी है कि कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘गंभीर’श्रेणी में पहुंच गया है,जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। दिल्ली का औसतAQI 361दर्ज किया गया,जो’बहुत खराब’श्रेणी में आता है।दिल्ली के वजीरपुर और बवाना जैसे इलाकों में तोAQI 424के खतरनाक स्तर को भी पार कर गया। हालात इतने बुरे हैं कि शनिवार को दिल्ली देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया था। सिर्फ दिल्ली ही नहीं, NCRके शहर नोएडा (AQI 354),ग्रेटर नोएडा (AQI 336)और गाजियाबाद (AQI 339)भी इस जहरीली हवा की चपेट में हैं।इस ज़हर के पीछे कौन?आखिर दिल्ली की हवा में यह जहर घोल कौन रहा है? IITMके आंकड़ों के अनुसार,इसके दो सबसे बड़े गुनहगार हैं:पराली का धुआं:रविवार को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का हिस्सा31%से भी अधिक होने का अनुमान है,जो इसे सबसे बड़ा विलेन बनाता है।गाड़ियों का प्रदूषण:इसके बाद दूसरा नंबर आता है सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों का,जिनका दिल्ली के प्रदूषण में लगभग14.25%का योगदान है।मौसम विभाग ने भी चेतावनी दी है कि9से11नवंबर तक दिल्ली की हवा’बहुत खराब’श्रेणी में ही बनी रहेगी।कहां जल रही है पराली?इस मुद्दे पर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन (CAQM)लगातार पंजाब और हरियाणा सरकारों के साथ बैठकें कर रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो कुछ राहत और कुछ चिंता की बात है:पंजाब:यहां पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने की घटनाओं में कमी तो आई है (पिछले साल5,041के मुकाबले इस साल3,284),लेकिन मुक्तसर और फाजिल्का जैसे जिलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं,जो चिंता का विषय है।हरियाणा:हरियाणा ने इस मामले में बेहतरीन काम किया है। यहां पिछले साल888के मुकाबले इस साल सिर्फ206घटनाएं ही दर्ज हुई हैं।हवा’गंभीर’,फिर भी सरकार क्यों नहीं ले रही एक्शन?सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हवा इतनी खराब है,तो सरकार ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानीGRAPका स्टेज-3क्यों लागू नहीं कर रही है? (GRAP-3लागू होने पर शहर में निर्माण कार्यों और डीजल ट्रकों के घुसने पर रोक लग जाती है)।इस पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC)के अधिकारियों का तर्क हैरान करने वाला है। उनका कहना है कि इस साल नवंबर में दिल्ली की हवा पिछले साल के नवंबर से”बेहतर”है। एक अधिकारी ने बताया, “पिछले सात दिनों में से छह दिन हवा की गुणवत्ता पिछले साल के उन्हीं दिनों से बेहतर दर्ज की गई है। यह समय पर की गई कार्रवाई की वजह से संभव हुआ है।”अधिकारियों का कहना है कि वे धूल नियंत्रण,सड़कों की सफाई,एंटी-स्मॉग गन चलाने और गाड़ियों की सख्त जांच जैसे उपायों से स्थिति को कंट्रोल में रखे हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा, “पिछले सालGRAPस्टेज-3 13नवंबर को लागू हुआ था। इस बार हमें उम्मीद है कि हम उस स्थिति तक पहुंचने से बच जाएंगे।”