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बिहार में जीत की स्क्रिप्ट तो हरियाणा में ही लिख दी गई थी, विपक्ष बस देखता रह गया

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News India Live, Digital Desk: बिहार 2025 के चुनावी नतीजों ने कई लोगों को हैरत में डाल दिया है. 20 साल की सत्ता विरोधी लहर के बावजूद नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए ने बड़ी आसानी से जीत हासिल कर ली. महागठबंधन, जिसे एक करीबी मुकाबले की उम्मीद थी, वो बस देखता रह गया. लेकिन क्या यह जीत वाकई अचानक मिली है? या फिर इसकी कहानी बहुत पहले, किसी और चुनावी मैदान में लिखी जा चुकी थी? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बिहार की इस जीत की नींव दरअसल हरियाणा के चुनावों में ही रख दी गई थी.

यह कोई अकेली जीत नहीं, बल्कि एक पैटर्न का हिस्सा है. याद कीजिए हरियाणा का चुनाव, जहां किसी को बीजेपी की आसान जीत की उम्मीद नहीं थी, लेकिन नतीजे आए तो सब चौंक गए. विपक्ष पर आरोप लगे कि उसने जीती हुई बाजी को हाथ से जाने दिया. यही खेल फिर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिला. लोकसभा में उम्मीद के मुताबिक नतीजे न मिलने के कुछ महीने बाद ही एनडीए ने इन राज्यों में ऐसी वापसी की कि विपक्ष हैरान रह गया.

कहां चूक गया विपक्ष?

बिहार का नतीजा विपक्ष के लिए एक बड़ा सबक है. लोकसभा चुनाव के बाद बनी थोड़ी-बहुत उम्मीद भी अब टूट गई है. ऐसा लगता है कि विपक्ष एनडीए की रणनीति को समझ ही नहीं पा रहा है. हरियाणा से लेकर बिहार तक के चुनाव दिखाते हैं कि एनडीए ने माहौल को बड़ी चतुराई से भांपा और अपनी चालें चलीं, जबकि विपक्षी दल अपने पुराने तौर-तरीकों में ही फंसे रह गए.

बिहार में चला एनडीए का जातीय समीकरण

इस बार एनडीए ने बिहार में अपनी सोशल इंजीनियरिंग पर बहुत ध्यान दिया. चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा को साथ जोड़कर एनडीए ने उस वोट बैंक को साधा, जो 2020 में बिखर गया था. इन दोनों नेताओं की पार्टियों को मिलाकर पिछली बार लगभग 7% वोट मिले थे. भले ही मुकेश सहनी इस बार महागठबंधन के साथ चले गए, लेकिन पासवान और कुशवाहा ने उनकी कमी को पूरा करने से कहीं ज्यादा काम किया. 2020 चुनाव के बाद जो बीजेपी-जेडी(यू) और जेडी(यू)-एलजेपी के बीच अनबन की खबरें थीं, वो भी इस बार बेअसर साबित हुईं.

कुल मिलाकर, जिस चुनाव को कांटे की टक्कर माना जा रहा था, वह एकतरफा जीत में बदल गया. यह नतीजा दिखाता है कि चुनावी बिसात पर चालें बहुत पहले चली जा चुकी थीं और विपक्ष इस खेल को समझने में पूरी तरह से नाकाम रहा.

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