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कलावा उतारने का सही दिन नहीं जानते? आपकी एक गलती पड़ सकती है बहुत भारी

News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ से लेकर किसी भी शुभ काम की शुरुआत में हाथ की कलाई पर कलावा या मौली बांधने की परंपरा है। यह सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि रक्षा और संकल्प का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि यह हमें बुरी नजर से बचाता है और हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।हम में से ज़्यादातर लोग कलावा बांधते तो हैं, लेकिन अक्सर इसे बदलने और उतारने से जुड़े ज़रूरी नियमों को नहीं जानते। गलत तरीके से या गलत दिन पर कलावा उतारना अशुभ माना जाता है। चलिए, आज जानते हैं कलावा बांधने, उतारने और बदलने से जुड़े कुछ बेहद ज़रूरी नियम, जो हर किसी को पता होने चाहिए।पुरुष और महिलाओं के लिए क्या हैं अलग-अलग नियम?पुरुषों और अविवाहित लड़कियों के लिए: ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, पुरुषों और अविवाहित कन्याओं को कलावा हमेशा अपने दाहिने यानी सीधे हाथ में बंधवाना चाहिए। दाहिना हाथ व्यक्ति के सामर्थ्य और संकल्प से जुड़ा होता है।विवाहित महिलाओं के लिए: वहीं, विवाहित महिलाओं को कलावा अपने बाएं यानी उल्टे हाथ में बांधना चाहिए। बायां हाथ शरीर की ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक माना गया है, और यह नियम शिव-शक्ति के संतुलन को भी दर्शाता है।कलावा बांधते समय रखें इन बातों का ध्यानकलावा बंधवाते समय आपकी मुट्ठी बंधी होनी चाहिए और दूसरा हाथ सिर पर होना चाहिए।यह धागा सिर्फ तीन बार ही लपेटा जाना चाहिए, क्योंकि यह त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक है।कलावा बांधते या बंधवाते समय मंत्रोच्चार करना बहुत शुभ माना जाता है।किस दिन बदलें पुराना कलावा?यह सबसे ज़रूरी सवाल है। अक्सर लोग पुराना कलावा टूटने या रंग उतरने पर किसी भी दिन उतारकर फेंक देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत है।कलावा बदलने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है।इन दो दिनों में आप पुराना कलावा उतारकर नया कलावा धारण कर सकते हैं।इसके अलावा किसी और दिन, खासकर एकादशी या अमावस्या जैसे दिनों में, कलावा उतारने से बचना चाहिए।पुराने कलावे का क्या करें?यह भी एक अहम बात है। पुराने कलावे को कभी भी कूड़ेदान में या इधर-उधर फेंकना नहीं चाहिए। यह उसका अपमान होता है।पुराने कलावे को सम्मानपूर्वक उतारकर किसी पीपल के पेड़ की जड़ में रख दें।अगर आसपास पेड़ न हो, तो इसे किसी बहते हुए पवित्र जल में प्रवाहित कर दें।ये छोटी-छोटी बातें हमारी आस्था और परंपराओं से जुड़ी हैं। इनका ध्यान रखने से न सिर्फ हमें मनोवैज्ञानिक रूप से अच्छा महसूस होता है, बल्कि यह भी माना जाता है कि इससे हमें सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।