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Casein Protein Textile : आप अब तक पहन रहे थे सिर्फ़ कॉटन दूध से बना फैब्रिक कैसे पहनकर बन सकता है आपका हर दिन चमत्कारी

News India Live, Digital Desk: हम सबने आज तक ऊन, कॉटन, सिल्क या सिंथेटिक फ़ैब्रिक (Synthetic Fabrics) के कपड़े तो पहने हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दूध (Milk Fabric) से बने कपड़े कैसे होते होंगे? सुनने में थोड़ा अटपटा लग सकता है, लेकिन यह कोई मज़ाक नहीं है!आजकल दुनिया में फ़ैशन (Fashion and Innovation) के नाम पर मिल्क फ़ैब्रिक (Milk Clothes Story) का कॉन्सेप्ट काफ़ी चर्चा में है, जिसे ‘मिल्क सिल्क’ (Milk Silk or Milk Fabric) भी कहा जाता है. तो क्या सचमुच गाय के दूध (Cow Milk Use in Cloth) से कपड़ा बन सकता है और बाज़ार में इसकी क्या ख़ासियत है? आइए, इस अनूठी कहानी को समझते हैं.मिल्क फैब्रिक कैसे बनाया जाता है? (How is Milk Fabric Made?):यह एक ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया (Scientific Process of Fabric) है जो सचमुच हैरान कर देती है. यह पूरा आइडिया उस दूध का इस्तेमाल करता है, जो पीने लायक नहीं बचता या इस्तेमाल नहीं हो पाता. इस बेकार हो चुके दूध से एक ख़ास तरह का केसिन प्रोटीन (Casein Protein Fabric) निकाला जाता है.News India Live, Digital Desk : इसके बाद इस प्रोटीन को शुद्ध किया जाता है, उसमें से फैट को हटाकर कुछ नेचुरल तत्त्वों को मिलाया जाता है, और एक विशेष प्रक्रिया (Extrusion Process) से गुज़ारकर इससे बारीक़ फ़ाइबर (Milk Fine Fiber) या धागे बनाए जाते हैं. इन्हीं धागों से फिर बुनाई करके यह कपड़ा तैयार किया जाता है!मिल्क फैब्रिक क्यों है इतना ख़ास? (Specialty of Milk Clothes):कोमल अहसास (Soft Texture): पहनने वाले कहते हैं कि यह फ़ैब्रिक रेशम (Silk) या सिल्क जितना ही कोमल होता है. त्वचा (Skin Care Fabric) को यह बहुत मुलायम अहसास देता है, जिसे सेंसिटिव स्किन वाले भी आराम से पहन सकते हैं.हल्का और हवादार: यह गर्मी में भी बहुत आरामदायक होता है, क्योंकि यह काफ़ी हल्का (Light Weight Clothes) और हवादार माना जाता है.पर्यावरण के लिए अच्छा: सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल (Biodegradable Fabric) होता है. इसे बनाने में पानी का इस्तेमाल भी कम होता है, इसलिए यह एक इको-फ्रेंडली फ़ैब्रिक (Eco-Friendly Milk Fabric) माना जाता है.इसकी कीमत क्या है? (Price of Milk Fabric Shirt):यह कपड़ा क्योंकि एक ख़ास तकनीक (Expensive Technology) से तैयार होता है, इसलिए यह बाक़ी फ़ैब्रिक के मुकाबले काफ़ी महंगा है. बाज़ार में दूध से बनी एक साधारण शर्ट या टी-शर्ट (Milk Fabric Shirt Price) की क़ीमत, उसकी क्वॉलिटी के हिसाब से आम कॉटन की टी-शर्ट से कई गुना ज़्यादा हो सकती है.साफ़ है, यह ‘दूध वाले कपड़े’ (Doodh ke kapde) का बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है और फ़ैशन के भविष्य (Future of Fashion) में ये कपड़े एक मज़बूत जगह बना सकते हैं!