
News India Live, Digital Desk : आज के समय में “फिटनेस” सिर्फ एक ज़रूरत नहीं, बल्कि एक ट्रेंड बन चुका है। हम में से बहुत से लोग हैं जो फिट रहने के लिए अलार्म बजते ही बिस्तर छोड़ देते हैं और सीधे जिम या पार्क की तरफ दौड़ पड़ते हैं। यह जुनून अच्छा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि “आधे मन और अधूरी नींद” के साथ की गई एक्सरसाइज आपकी सेहत बनाने के बजाय उसे बिगाड़ सकती है?हाल ही में हुई एक चौंकाने वाली रिसर्च (Study) ने उन लोगों के लिए खतरे की घंटी बजाई है, जो अपनी नींद के घंटों (Sleep hours) के साथ समझौता करते हैं।क्या कहती है यह रिसर्च? (What Does Science Say?)सरल भाषा में कहें तो, अगर आप रोज़ाना 7 घंटे से कम सो रहे हैं, तो आपके वर्कआउट के दौरान घायल (Injured) होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अक्सर हम सोचते हैं कि जिम में भारी डंबल उठाने से ही इंजरी होती है, लेकिन असलियत यह है कि इंजरी का सबसे बड़ा कारण आपका “थका हुआ दिमाग” होता है।नींद की कमी आपको कैसे घायल करती है?इसे वैज्ञानिक नहीं, बल्कि आम जिंदगी के नजरिए से समझिए:फोकस का हिल जाना (Lack of Concentration): जब नींद पूरी नहीं होती, तो हमारा दिमाग सुस्त रहता है। जिम में भारी वज़न उठाते समय अगर एक पल के लिए भी ध्यान हटा, तो समझिये बड़ा हादसा हो सकता है।बैलेंस और रिफ्लेक्स में कमी: कम सोने से शरीर का ‘रिएक्शन टाइम’ धीमा हो जाता है। यानी अगर पैर फिसला या डंबल हाथ से छूटा, तो आप खुद को समय रहते संभाल नहीं पाएंगे।मांसपेशियों की थकान (Muscle Fatigue): याद रखिये, बॉडी जिम में नहीं, बल्कि बिस्तर पर बनती है! जब आप सोते हैं, तभी आपकी मसल्स रिपेयर होती हैं। अगर रिकवरी नहीं होगी, तो पुरानी थकान नई चोट को जन्म दे देगी।तो क्या जिम जाना छोड़ दें?बिल्कुल नहीं! बस अपनी प्राथमिकताएं (Priorities) थोड़ी बदलें।7-8 घंटे का थम्ब रूल: कोशिश करें कि वर्कआउट रूटीन के साथ-साथ स्लीप रूटीन भी फिक्स हो।सुनें अपने शरीर की: जिस दिन बहुत थकान हो, उस दिन हैवी वेट (Heavy Weight) मारने के बजाय योगा या हल्की स्ट्रेचिंग करें।पावर नैप: अगर रात की नींद पूरी नहीं हुई है, तो वर्कआउट से पहले दिन में एक छोटी सी झपकी लेना भी फायदेमंद हो सकता है।
UK News
