
News India Live, Digital Desk : आपने अक्सर मंदिरों में साधु-संतों या अपने आस-पास कई लोगों के गले में लकड़ी के दानों वाली एक माला देखी होगी। जी हाँ, हम ‘तुलसी माला’ (Tulsi Mala) की बात कर रहे हैं। कई बार हम सोचते हैं कि लोग इसे सिर्फ पूजा-पाठ के लिए पहनते हैं, लेकिन सच बताऊँ तो इसका असर इससे कहीं ज्यादा गहरा है।हमारे शास्त्रों में ही नहीं, बल्कि अब तो विज्ञान भी यह मानता है कि तुलसी के पौधे में अद्भुत गुण होते हैं। तो सोचिए, अगर उस पौधे की लकड़ी हर वक्त आपके शरीर से छू रही हो, तो उसका कितना असर होगा? आज हम बिल्कुल आसान भाषा में समझेंगे कि आखिर तुलसी माला पहनने के फायदे क्या हैं और इसे पहनते समय किन बातों का (Rules) ख्याल रखना बहुत जरूरी है।भगवान विष्णु और कृष्ण की विशेष कृपासबसे पहली बात तो आस्था की है। जो लोग भगवान विष्णु या श्री कृष्ण को मानते हैं, उनके लिए तुलसी माला एक ‘वरदान’ जैसी है। ऐसा माना जाता है कि इसे गले में धारण करने वाले व्यक्ति पर भगवान की नजर हमेशा रहती है। यह माला आपको बुरे विचारों और नकारात्मक ऊर्जा से बचाकर रखती है।मन और सेहत का कनेक्शनअब बात करते हैं फायदे की। आपने महसूस किया होगा कि आजकल लोग बहुत जल्दी तनाव (Stress) में आ जाते हैं। तुलसी माला इसमें जादू का काम करती है।प्रेशर प्वाइंट्स: जब गले में पड़ी यह माला हिलती है, तो गले के कुछ खास एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स दबते हैं, जिससे नसों में खिंचाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है।बिजली का प्रवाह: कहा जाता है कि शरीर में विद्युत शक्ति (Bio-electricity) को बैलेंस करने में भी यह मददगार है। इसे पहनने वालों को गुस्सा कम आता है और मन शांत रहता है।लेकिन सावधान! नियम जानना बहुत जरूरी हैदोस्तों, तुलसी माला कोई फैशन की चीज नहीं है जिसे जब चाहे पहन लिया और जब चाहे उतार दिया। इसे धारण करने के कुछ सख्त नियम हैं, जिन्हें मानना ही पड़ता है, नहीं तो इसका उल्टा असर भी हो सकता है।सात्विक भोजन: सबसे बड़ा नियम यही है। जो व्यक्ति तुलसी की कंठी या माला पहनता है, उसे मांस-मदिरा (Non-veg और Alcohol) से कोसों दूर रहना चाहिए। साथ ही, बहुत अधिक तामसिक भोजन (जैसे बहुत ज्यादा लहसुन-प्याज) से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है।पवित्रता: शौच या किसी अशुद्ध स्थान पर जाते समय कई लोग इसे उतारना सही मानते हैं, हालाँकि कुछ संत कहते हैं कि तुलसी हमेशा शरीर पर रहनी चाहिए क्योंकि वह गंगाजल समान पवित्र है। फिर भी, अपनी कुल परम्परा के अनुसार नियमों का पालन करें।शरीर से स्पर्श: माला ऐसी होनी चाहिए जो आपके गले की त्वचा को छूती रहे। तभी इसके औषधीय गुण पसीने या त्वचा के जरिए शरीर को मिलेंगे।झूठा न बोलें: माना जाता है कि इसे पहनने वाले को झूठ और छल-कपट से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए।असली माला की पहचान कैसे करें?बाजार में नकली मालाओं की भरमार है। अगर आपको असली तुलसी की पहचान करनी है, तो उसे करीब 30 मिनट पानी में रखें। अगर वो रंग छोड़ने लगे, तो समझ जाइये वो नकली है। असली तुलसी की लकड़ी पानी में रंग नहीं छोड़ती।तो दोस्तों, अगर आप भी अपने जीवन में थोड़ी शांति और भक्ति लाना चाहते हैं, तो विधि-विधान से किसी गुरु से मंत्र लेकर तुलसी माला धारण कर सकते हैं। बस, इसकी पवित्रता का सम्मान जरूर करें।
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