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Putrada Ekadashi 2026 2026 : संतान की सुख-खुशहाली के लिए रखते हैं यह व्रत जानें सही तारीख

News India Live, Digital Desk: नए साल यानी 2026 की शुरुआत हो चुकी है और इसके साथ ही त्योहारों और व्रतों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। हिन्दू धर्म में वैसे तो हर एकादशी का अपना महत्व है, लेकिनपौष मास की पुत्रदा एकादशी को बेहद खास माना जाता है। जैसा कि नाम से ही पता चलता है, यह एकादशी उन लोगों के लिए सबसे अहम है जो संतान सुख की कामना करते हैं या अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और उनकी तरक्की के लिए ईश्वर से प्रार्थना करना चाहते हैं।साल 2026 में कब है पुत्रदा एकादशी?तारीखों को लेकर अक्सर लोगों के मन में उलझन रहती है। साल 2026 में पौष मास की पुत्रदा एकादशी की तिथि को लेकर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। पंचांग के अनुसार, यह व्रत1 जनवरी 2026 के आस-पास (दशमी के बाद) के मुहूर्त में पड़ रहा है। एकादशी की तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय जानना इसलिए जरूरी है ताकि आपका व्रत और पारण सही समय पर हो सके।व्रत के वो नियम जो जानना है बेहद जरूरीदेखिए, व्रत रखने का मतलब सिर्फ भूखा रहना नहीं होता। एकादशी के नियम तो दशमी की रात से ही शुरू हो जाते हैं।सात्विक भोजन: दशमी के दिन शाम को ही सात्विक भोजन करें और प्याज-लहसुन से दूरी बना लें।ब्रह्म मुहूर्त का स्नान: एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले कपड़े पहनकर भगवान विष्णु की पूजा करें।तुलसी की पूजा: विष्णु जी की पूजा बिना तुलसी के पूरी नहीं होती, लेकिन याद रहे कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित है। इसलिए पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़ कर रख लें।ये 5 गलतियां व्रत को कर सकती हैं खंडितअक्सर हम अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जिससे हमारी पूजा अधूरी रह जाती है:चावल का सेवन: एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह से मना है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन चावल का सेवन करना शास्त्रों के विरुद्ध है।अपशब्द न कहें: यह सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक व्रत भी है। किसी का दिल न दुखाएं और घर में झगड़ा या विवाद न करें।दिन में सोना: व्रती को एकादशी के दिन दिन में सोने से बचना चाहिए। इसके बजाय भगवान के नाम का सुमिरन करना लाभकारी होता है।बिना संकल्प की पूजा: पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल और फूल लेकर संकल्प जरूर लें, तभी वह व्रत पूरा माना जाता है।दान का क्या है महत्व?इस पावन दिन पर जरूरतमंदों को दान देने का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। पुत्रदा एकादशी पर अन्न, पीले वस्त्र, केला या गुड़ का दान करना बहुत शुभ माना गया है। अगर आप संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत कर रहे हैं, तो छोटे बच्चों को मिठाइयां या शिक्षा से जुड़ी सामग्री बांटना भी आपके लिए फलदायी हो सकता है।अंत में बस यही…भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का यह एक बहुत ही सरल लेकिन शक्तिशाली माध्यम है। अगर आप पूरे मन और शुद्ध हृदय से भगवान कृष्ण और विष्णु जी की शरण में जाते हैं, तो आपकी मुराद जरूर पूरी होती है। अपनी श्रद्धा को अटूट रखें और नियमों का पालन करें।