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ज़िद पालने वाले अक्सर डूब जाते हैं, चाणक्य की इन 5 बातों को मान लिया तो बड़ी मुसीबतों से बच जाएंगे आप

News India Live, Digital Desk : अक्सर हमें सिखाया जाता है कि जीवन में हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। लेकिन भारतीय राजनीति और कूटनीति के पितामह कहे जाने वाले आचार्य चाणक्य की सोच थोड़ी अलग और कहीं ज्यादा गहरी थी। उनका मानना था कि हमेशा सिर उठाकर लड़ना ही वीरता नहीं है; असली वीर और बुद्धिमान वह है जिसे पता हो कि कब पीछे हटना है और कब अपनी जान बचाकर सुरक्षित जगह निकल जाना है।आज के भागदौड़ वाले समय में, जब हम हर जगह जीतना चाहते हैं, तब चाणक्य के ये 5 मंत्र आपको किसी भी बड़ी तबाही से बचा सकते हैं। आइये जानते हैं वे कौन सी परिस्थितियाँ हैं जहाँ आपका रुक जाना ही आपकी सबसे बड़ी जीत है।1. दंगों या अराजकता वाली जगहआचार्य चाणक्य कहते हैं कि अगर किसी जगह दंगे भड़क रहे हों या वहाँ भारी भीड़ अनियंत्रित होकर हिंसा पर उतारू हो, तो वहां खड़े होकर तमाशा देखना या न्याय की बातें करना बेवकूफी है। भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता और वह कानून को नहीं मानती। ऐसी जगह से तुरंत दूर हो जाना चाहिए क्योंकि वहां फंसी एक भी गलती या दुर्घटना आपके पूरे भविष्य को अंधकार में डाल सकती है।2. जब दुश्मन आपसे कई गुना ज्यादा ताकतवर होइंसान के अंदर जोश होना अच्छी बात है, लेकिन होश खो देना बर्बादी का कारण है। अगर आपका सामना किसी ऐसे व्यक्ति या संस्था से है जिसकी शक्ति आपसे कहीं ज्यादा है, तो वहाँ अकेले लड़कर जान देना बुद्धिमानी नहीं, बल्कि मूर्खता है। चाणक्य के अनुसार, ऐसी स्थिति में कुछ समय के लिए पीछे हटकर खुद को तैयार करना चाहिए। यह कायरता नहीं, बल्कि भविष्य की जीत के लिए एक सधी हुई चाल है।3. भयंकर अकाल के समययहाँ अकाल का मतलब सिर्फ भुखमरी नहीं, बल्कि संसाधनों की कमी भी है। चाणक्य नीति कहती है कि अगर आपके इलाके में भारी अकाल पड़ जाए, रोजगार के साधन खत्म हो जाएं और पेट भरना मुश्किल हो जाए, तो वहां मरना ठीक नहीं। ऐसे में उस जगह को छोड़कर उस दिशा में निकल जाना चाहिए जहाँ जीविका (रोजगार) और शांति मिल सके। इंसान जीवित रहेगा, तभी तो फिर से खुशहाल कल का निर्माण करेगा।4. बुरे स्वभाव के लोगों का साथअगर आपके आस-पास के लोग गंदी राजनीति करने वाले, धोखा देने वाले या चरित्रहीन हैं, तो वहां से जितनी जल्दी हो सके रास्ता बदल लें। चाणक्य का मानना था कि कुत्ता काटेगा तो घाव होगा, लेकिन बुरी संगत आपकी आत्मा और समाज में आपकी प्रतिष्ठा दोनों को घायल कर देगी। ऐसी जगहों पर रहकर आप कभी आगे नहीं बढ़ सकते, क्योंकि वे आपकी ऊर्जा और सोच को सोख लेते हैं।5. युद्ध या हमले की स्थितिअगर आपके देश या राज्य पर अचानक किसी बाहरी दुश्मन का हमला हो जाए और आपके पास बचने या लड़ने की कोई ठोस रणनीति न हो, तो बेवजह जोखिम उठाना आत्मघाती हो सकता है। चाणक्य कहते हैं कि किसी सुरक्षित जगह पर जाकर फिर से गठबंधन बनाना और दुश्मन को हराने की तैयारी करना ही सर्वश्रेष्ठ युद्ध नीति है।