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बजट से पहले अर्थव्यवस्था के लिए बूस्टर डोज़, 26 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची औद्योगिक विकास दर

News India Live, Digital Desk: 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से ठीक पहले भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत ही सकारात्मक खबर आई है। देश के औद्योगिक उत्पादन (IIP) ने रफ्तार पकड़ ली है। दिसंबर 2025 के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक पिछले 26 महीनों के शिखर पर पहुंच गया है।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट पेश किए जाने से पहले इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन की यह छलांग विकसित भारत के लक्ष्य की ओर एक मजबूत कदम मानी जा रही है।IIP ग्रोथ: दिसंबर 2025 के मुख्य आंकड़ेदिसंबर 2025 में देश की औद्योगिक विकास दर 7.8 प्रतिशत रही, जो पिछले दो साल से भी अधिक समय का सबसे उच्चतम स्तर है।बड़ी छलांग: नवंबर 2025 में यह 6.7% थी, जो अब बढ़कर 7.8% हो गई है।मैन्युफैक्चरिंग का जलवा: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जबरदस्त सुधार देखा गया है, जो 3.7% से बढ़कर 8.1% पर पहुंच गया है।सेक्टर-वार प्रदर्शन: * माइनिंग (Mining): 6.8% की दर से वृद्धि।बिजली (Electricity): 6.3% की दर से वृद्धि।किन उद्योगों ने मारी बाजी?दिसंबर के आंकड़ों में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि कुछ खास हाई-टेक और ट्रांसपोर्ट सेक्टरों ने शानदार प्रदर्शन किया है:कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद: सबसे ज्यादा 34.9% की वृद्धि।ऑटोमोबाइल सेक्टर: मोटर वाहन और ट्रेलर उद्योग में 33.5% की बढ़ोतरी।इंफ्रास्ट्रक्चर गुड्स: बुनियादी ढांचे से जुड़े सामानों के उत्पादन में 12.1% की तेजी।कंज्यूमर गुड्स: कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (जैसे फ्रिज, एसी आदि) में 12.3% और नॉन-ड्यूरेबल्स (FMCG) में 8.3% की रिकवरी दर्ज की गई है।एक नज़र में तुलनात्मक आंकड़े (YoY)सेक्टरपहले (Growth)अब (Dec 2025)IIP (ओवरऑल)3.7%7.8%मैन्युफैक्चरिंग3.7%8.1%माइनिंग2.7%6.8%कंज्यूमर ड्यूरेबल्स8.1%12.3%इंफ्रास्ट्रक्चर गुड्स8.4%12.1%बजट सत्र 2026 और अगला रोडमैप28 जनवरी से शुरू हुए बजट सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण के साथ ही सरकार ने अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया है।इकोनॉमिक सर्वे: कल यानी 29 जनवरी को वित्त मंत्री संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेंगी, जिसमें इन आंकड़ों का और गहरा विश्लेषण देखने को मिलेगा।अगली रिपोर्ट: जनवरी 2026 के IIP आंकड़े सोमवार, 2 मार्च 2026 को जारी किए जाएंगे।औद्योगिक उत्पादन में यह उछाल दर्शाती है कि घरेलू मांग (Domestic Demand) और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता दोनों में सुधार हो रहा है, जो आने वाले बजट में निवेश और व्यापार को लेकर नई उम्मीदें जगाता है।