
News India Live, Digital Desk: हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को ‘द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी’ के रूप में मनाया जाता है। आज यानी 4 फरवरी 2026 को यह पावन व्रत रखा जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश के ‘द्विजप्रिय’ स्वरूप की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से सभी संकट दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक कि रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य न दे दिया जाए।शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय (Moon Rise Time)आज के दिन चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। ज्योतिष गणना के अनुसार, विभिन्न शहरों में चंद्रोदय का समय थोड़ा भिन्न हो सकता है, लेकिन औसतन समय इस प्रकार है:चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 4 फरवरी 2026, सुबह से।चंद्रोदय (Moonrise) का समय: रात्रि 09:15 PM (स्थान के अनुसार 5-10 मिनट का अंतर संभव है)।शुभ मुहूर्त: शाम 06:10 बजे से रात्रि 08:30 बजे तक पूजा का विशेष फल मिलेगा।भगवान गणेश के ‘द्विजप्रिय’ स्वरूप की महिमाद्विजप्रिय गणेश भगवान के 32 स्वरूपों में से 6वें स्वरूप हैं। ‘द्विज’ का अर्थ है ब्राह्मण या दोबारा जन्म लेने वाला। इस स्वरूप में गणपति के चार हाथ होते हैं और वे शास्त्र व माला धारण किए होते हैं। इनकी पूजा करने से विशेष रूप से बुद्धि, विद्या और अच्छी सेहत का वरदान प्राप्त होता है।पूजा विधि: ऐसे करें बप्पा को प्रसन्नशुद्धिकरण: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र (संभव हो तो पीले या लाल) धारण करें।संकल्प: हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें।स्थापना: चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।भोग: गणपति को दूर्वा, अक्षत, सिंदूर और उनके प्रिय मोदक या लड्डू अर्पित करें।मंत्र जाप: ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का जाप करें और संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ें।अर्घ्य: रात्रि में चंद्रमा निकलने पर जल में दूध, अक्षत और पुष्प मिलाकर अर्घ्य दें।संकट दूर करने के विशेष उपायकर्ज मुक्ति के लिए: आज के दिन ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।बाधाओं के नाश के लिए: भगवान गणेश को 21 दूर्वा की गांठें अर्पित करें, इससे कार्य में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।सुख-शांति के लिए: पूजा के समय गणेश जी को गुड़ और तिल के लड्डू का भोग लगाएं। विशेष नोट: संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने वाले जातकों को आज के दिन सात्विक भोजन करना चाहिए और मन में किसी के प्रति द्वेष नहीं रखना चाहिए।
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