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Namaste Trump vs Howdy Modi : क्या करोड़ों खर्च के बाद भी भारत के हाथ ट्रेड डील में खाली रहे? कांग्रेस का तीखा हमला

News India Live, Digital Desk: राजनीति में इवेंट्स की चमक-धमक अक्सर असल समझौतों पर भारी पड़ जाती है। कुछ ऐसा ही दावा अब कांग्रेस ने ‘नमस्ते ट्रंप’ (Namaste Trump) और ‘हाउडी मोदी’ (Howdy Modi) कार्यक्रमों को लेकर किया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के बाद भी अमेरिका के साथ होने वाली ‘ट्रेड डील’ भारत के पक्ष में वैसी नहीं रही जैसी उम्मीद की गई थी।इवेंट की भव्यता और दावों की हकीकतआपको याद होगा, अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में जब डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी ने मंच साझा किया था, तो इसे भारत-अमेरिका संबंधों के नए युग की शुरुआत बताया गया था। लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि इस ‘फोटो-ऑप’ (Photo-op) के पीछे के आर्थिक आंकड़े काफी निराशाजनक हैं।विपक्ष के मुख्य सवाल:ट्रेड डील का क्या हुआ? क्या केवल मेगा इवेंट्स से व्यापारिक घाटा कम हुआ?आम जनता पर बोझ: इन आयोजनों पर हुए करोड़ों के खर्च का वास्तविक रिटर्न क्या रहा?रणनीतिक विफलता: क्या अमेरिका ने भारत को व्यापारिक रियायतें देने के बजाय अपनी शर्तें थोपीं?सोशल मीडिया पर छिड़ी बहसकांग्रेस ने अपने आधिकारिक हैंडल से तंज कसते हुए कहा कि जिस ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम को गेम चेंजर बताया जा रहा था, वह केवल एक इवेंट बनकर रह गया। पार्टी का तर्क है कि आंकड़ों के लिहाज से भारत को जो व्यापारिक लाभ (Trade Benefits) मिलने चाहिए थे, वे ट्रंप प्रशासन के दौरान ठंडे बस्ते में चले गए।क्या कहते हैं विशेषज्ञ?राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी नेताओं के स्वागत में होने वाले भव्य आयोजन सॉफ्ट पावर (Soft Power) बढ़ाने के लिए तो अच्छे हैं, लेकिन जब बात इकोनॉमिक पॉलिसी की आती है, तो अमेरिका हमेशा अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति पर अडिग रहता है। ऐसे में केवल इवेंट्स के भरोसे बड़ी डील की उम्मीद करना जोखिम भरा हो सकता है।