Thursday , October 29 2026

Kashmiri Pandits Bill : संसद में नहीं पेश हो सका कश्मीरी पंडितों के अधिकारों पर बिल ,शशि थरूर का छलका दर्द

News India Live, Digital Desk: बजट सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच शुक्रवार (6 फरवरी, 2026) को कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य रुक गए। इनमें कांग्रेस सांसद शशि थरूर का वह बहुप्रतीक्षित विधेयक भी शामिल था, जिसे उन्होंने विशेष रूप से कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और अधिकारों के लिए तैयार किया था।1. शशि थरूर की प्रतिक्रिया (X पर पोस्ट)शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा:लंबा इंतजार: उन्होंने बताया कि इस विधेयक का ड्राफ्ट उन्होंने पहली बार 2021 में तैयार किया था, जिसे 17वीं लोकसभा के दौरान अधिकारियों ने रोक दिया था।लिस्टिंग के बाद भी निराशा: इसे पिछले साल 18वीं लोकसभा में फिर से जमा किया गया और आखिरकार 5 साल बाद इसे शुक्रवार के लिए ‘लिस्ट’ किया गया था।हंगामे की भेंट: सदन में विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही 9 फरवरी तक स्थगित कर दी गई, जिससे यह बिल पेश नहीं हो सका।2. संसद में हंगामे के कारणइस हफ्ते संसद की कार्यवाही कई मुद्दों को लेकर बाधित रही, जिसने ‘प्राइवेट मेंबर डे’ (शुक्रवार) के कामकाज को प्रभावित किया:एमएम नरवणे की किताब: पूर्व सेना प्रमुख की किताब को लेकर हुए विवाद ने सदन की शांति भंग की।निलंबन का मुद्दा: विपक्ष के 8 सांसदों के निलंबन और राहुल गांधी को बोलने न दिए जाने के आरोपों पर कांग्रेस ने पूरे हफ्ते प्रदर्शन किया।व्यापार समझौता: भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया ट्रेड डील को लेकर भी सदन में नारेबाजी हुई।3. बिल में क्या है खास? (Key Features of the Bill)शशि थरूर का यह विधेयक मुख्य रूप से कश्मीरी पंडितों की निम्नलिखित मांगों पर केंद्रित है:अधिकारों की सुरक्षा: विस्थापित समुदाय के लिए ‘राइट ऑफ रिटर्न’ और पुनर्वास का वैधानिक ढांचा।आर्थिक सहायता: विस्थापितों के लिए विशेष वित्तीय पैकेज और संपत्ति की बहाली।दोषियों को सजा: 1990 के दशक में हुए अपराधों की जांच के लिए विशेष न्यायिक आयोग का गठन।