Wednesday , October 28 2026

Garuda Purana : बेजुबान जानवरों पर जुल्म करने वालों को यमराज देते हैं खौफनाक सजा, नर्क में भुगतने पड़ते हैं ऐसे कष्ट

News India Live, Digital Desk: सनातन धर्म के 18 पुराणों में ‘गरुड़ पुराण’ (Garuda Purana) का विशेष महत्व है। यह ग्रंथ न केवल मृत्यु के बाद की स्थितियों का वर्णन करता है, बल्कि जीवन जीने के सही तरीकों और कर्मों के फलों के बारे में भी विस्तार से बताता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, बेजुबान पशु-पक्षियों के प्रति क्रूरता करना महापाप की श्रेणी में आता है। भगवान विष्णु ने गरुड़ जी को बताया है कि जो लोग जानवरों को सताते हैं, उन्हें नर्क में किस तरह की यातनाएं झेलनी पड़ती हैं।जानवरों को सताने वालों के लिए ‘कुंभीपाकम’ नर्कगरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति अपने स्वार्थ या मनोरंजन के लिए निर्दोष पशुओं की हत्या करते हैं या उन्हें प्रताड़ित करते हैं, उन्हें ‘कुंभीपाकम’ (Kumbhipakam) नामक नर्क में भेजा जाता है। यहाँ यमदूत पापियों को खौलते हुए तेल के कड़ाहों में डालते हैं। माना जाता है कि पापी को वहाँ तब तक रखा जाता है, जब तक कि उसने जितने जीव मारे हैं, उनके शरीर पर मौजूद बालों के बराबर वर्षों तक वह सजा न भुगत ले।गरुड़ पुराण में वर्णित 3 बड़े पाप और उनकी सजापशुओं को भूखा-प्यासा रखना:जो लोग पालतू जानवरों (जैसे गाय, कुत्ता या घोड़ा) को बांधकर रखते हैं और उन्हें समय पर भोजन-पानी नहीं देते, वे अगले जन्म में दरिद्रता और भुखमरी का सामना करते हैं। ऐसे लोगों को नर्क में प्यास से तड़पाया जाता है।गर्भवती या लाचार जीव को मारना:किसी गर्भवती पशु या असहाय जीव को चोट पहुँचाना सबसे घृणित कार्य माना गया है। गरुड़ पुराण कहता है कि ऐसे पापियों को ‘रौरव नर्क’ में ले जाकर भयंकर विषैले सर्पों और कीटों के बीच छोड़ दिया जाता है।पक्षियों के घोंसले उजाड़ना:जो लोग मनोरंजन के लिए पक्षियों के घोंसले तोड़ते हैं या उनके बच्चों को नुकसान पहुँचाते हैं, उन्हें अगले जन्म में बेघर होना पड़ता है और वे पारिवारिक सुख से वंचित रहते हैं।कर्म सुधारने के उपाय: कैसे बचें इन पापों से?यदि अनजाने में आपसे किसी जीव को कष्ट पहुँचा है, तो शास्त्रों में इसके प्रायश्चित के मार्ग भी बताए गए हैं:गौ सेवा: गाय को हरा चारा खिलाएं और उसकी सेवा करें।चींटियों और पक्षियों को दाना: प्रतिदिन चींटियों को शक्कर मिला आटा और पक्षियों को दाना-पानी दें।श्वान (कुत्ते) की सेवा: काले कुत्ते को रोटी खिलाना न केवल शनि दोष दूर करता है, बल्कि जीव सेवा का पुण्य भी देता है।जीवन का मूल मंत्र: “आत्मवत् सर्वभूतेषु” अर्थात् सभी जीवों को अपनी ही आत्मा के समान समझें। बेजुबानों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है।