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Massive Strike: 12 फरवरी को थमेगी देश की रफ्तार! 30 करोड़ मजदूरों के साथ किसान भी उतरेंगे सड़कों पर; जानें क्या हैं मांगें

नई दिल्ली। देश में एक बार फिर बड़े आंदोलन की आहट सुनाई दे रही है। दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने सोमवार को घोषणा की है कि आगामी 12 फरवरी को बुलाई गई राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल (Nationwide General Strike) ऐतिहासिक होने वाली है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर के अनुसार, इस बार देश भर से कम से कम 30 करोड़ मजदूर इस हड़ताल का हिस्सा बनेंगे।पिछले साल इस तरह के प्रदर्शन में 25 करोड़ लोगों ने भागीदारी की थी, लेकिन इस बार किसान संगठनों और विभिन्न फेडरेशनों के साथ आने से यह आंकड़ा रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में है।600 जिलों में दिखेगा ‘भारत बंद’ का असरयूनियनों का दावा है कि इस बार हड़ताल की तैयारी ब्लॉक स्तर तक की गई है।विस्तार: हड़ताल का प्रभाव देश के लगभग 600 जिलों में देखने को मिलेगा।प्रभावित राज्य: अमरजीत कौर ने बताया कि ओडिशा और असम जैसे राज्यों में ‘पूर्ण बंद’ की स्थिति रहेगी। वहीं, भाजपा शासित राज्यों समेत देश के अन्य हिस्सों में भी व्यापक आंदोलन की तैयारी है।कौन-कौन शामिल: केंद्रीय मजदूर संघ (CTU), क्षेत्रीय संघ, औद्योगिक संगठन और कृषि मजदूर यूनियन इस हड़ताल को सफल बनाने के लिए एकजुट हुए हैं।ट्रेड डील और लेबर कोड पर ‘आर-पार’ की जंगहड़ताल के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दे हैं:लेबर कोड: ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि नए लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों का हनन करते हैं।भारत-अमेरिका ट्रेड डील: संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने इस व्यापार समझौते को भारतीय कृषि के लिए ‘आत्मसमर्पण’ बताया है। SKM ने इस मुद्दे पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के इस्तीफे की मांग भी की है।मनरेगा (MGNREGA): कृषि मजदूर यूनियनों का जोर मनरेगा को पूरी क्षमता के साथ बहाल करने और मजदूरों के बकाया भुगतान पर है।किसानों का समर्थन: आंदोलन को मिलेगी नई धारसंयुक्त किसान मोर्चा और कृषि मजदूर यूनियनों के इस हड़ताल में शामिल होने से इसका स्वरूप ‘मजदूर-किसान’ एकता के बड़े मंच में बदल गया है। संगठनों का कहना है कि सरकार की नीतियां कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने वाली हैं और इससे आम मजदूर व किसान हाशिए पर जा रहे हैं।क्या प्रभावित होगा?12 फरवरी को होने वाली इस हड़ताल से बैंकिंग सेवा, परिवहन, औद्योगिक उत्पादन और सरकारी कार्यालयों के कामकाज पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में चक्का जाम जैसी स्थितियां बन सकती हैं।