
News India Live, Digital Desk: ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक डराने वाली खबर सामने आई है। दानापुर रेल पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है जिसके तार नेपाल से जुड़े हैं। इस गिरोह का मुखिया सुशील कुमार सिंह है, जो सीमांचल एक्सप्रेस में कोच अटेंडेंट के सुपरवाइजर के रूप में तैनात था। पुलिस ने उसके पास से चोरी के 18 महंगे स्मार्टफोन बरामद किए हैं।कैसे खुला चोरी का यह अंतरराष्ट्रीय खेल?बुंदेलखंड (उत्तर प्रदेश) की कोतवाली पुलिस ने हाल ही में एक महिला से ठगी के मामले में कुछ संदिग्धों को पकड़ा था। पूछताछ में उन्होंने खुलासा किया कि वे ट्रेनों में वीआईपी यात्रियों को निशाना बनाते हैं और चोरी का माल एक सुपरवाइजर के जरिए नेपाल भेजते हैं।जोगबनी कनेक्शन: चोरी किए गए फोन को पहले जोगबनी (भारत-नेपाल सीमा) ले जाया जाता था, जहाँ से इन्हें आसानी से सीमा पार कराकर नेपाल के बाजारों में ऊंचे दामों पर बेचा जाता था।सुपरवाइजर का रोल: ‘रक्षक ही बना भक्षक’सुशील कुमार सिंह, जो सुपौल का निवासी है, रेलवे में अपनी पहचान का फायदा उठाकर सुरक्षित तरीके से चोरी के फोन की तस्करी करता था:सुरक्षित लॉजिस्टिक्स: रेल कर्मी होने के नाते उस पर शक कम होता था, जिससे वह चोरी के फोन को एक शहर से दूसरे शहर आसानी से ले जाता था।नेपाल में खपाने की साजिश: पुलिस के अनुसार, इन 18 फोन को नेपाल भेजने की तैयारी थी ताकि IMEI नंबर के जरिए ट्रैक होने से बचा जा सके। अंतरराष्ट्रीय सीमा पार होने के बाद भारतीय पुलिस के लिए इन फोन को ढूंढना लगभग नामुमकिन हो जाता है।गिरोह का ‘ऑपरेटिंग मॉडल’यह गिरोह केवल बिहार तक सीमित नहीं था। पुलिस जांच में पता चला है कि इनके गुर्गे उत्तर प्रदेश, बंगाल और दिल्ली जैसे राज्यों में सक्रिय हैं:टारगेट: ये बदमाश लंबी दूरी की ट्रेनों में एसी कोच के यात्रियों को निशाना बनाते थे।साइकोलॉजिकल गेम: अक्सर यात्री सामान चोरी होने पर कानूनी पचड़ों और यात्रा बीच में रुकने के डर से एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं कराते, जिसका फायदा यह गिरोह उठाता था।पुलिस की कार्रवाई और अलर्टरेल पुलिस अब नेपाल में बैठे इन फोन के खरीदारों और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। पुलिस ने यात्रियों से अपील की है कि:सफर के दौरान अपने कीमती फोन और गैजेट्स को लावारिस न छोड़ें।यदि कोई रेल कर्मी संदिग्ध लगे, तो तुरंत रेल मदद ऐप (RailMadad) या 139 पर सूचना दें।
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