
News India Live, Digital Desk: रमजान का पवित्र महीना चल रहा है बिहार के विभिन्न शहरों में रोजेदारों के लिए इफ्तार (Iftar) और सहारी (Sehri) का समय क्षेत्र के अनुसार थोड़ा अलग-अलग है।इस्लाम में रमजान के दौरान समय का बहुत महत्व है। सूरज डूबने के समय को इफ्तार और सूरज निकलने से पहले के भोजन के समय को सहरी कहा जाता है।बिहार के प्रमुख शहरों में समय (2-3 मार्च 2026)शहर (City)इफ्तार का समय (आज)सहरी का समय (कल)पटना (Patna)शाम 5:52 बजेसुबह 4:48 बजेमुजफ्फरपुर (Muzaffarpur)शाम 5:49 बजेसुबह 4:45 बजेगया (Gaya)शाम 5:54 बजेसुबह 4:50 बजेभागलपुर (Bhagalpur)शाम 5:44 बजेसुबह 4:40 बजेपूर्णिया (Purnia)शाम 5:40 बजेसुबह 4:36 बजेदरभंगा (Darbhanga)शाम 5:47 बजेसुबह 4:43 बजेइफ्तार और सहरी के बीच का अंतरभौगोलिक स्थिति के कारण बिहार के पूर्वी हिस्सों (जैसे पूर्णिया) और पश्चिमी हिस्सों (जैसे बक्सर) के समय में लगभग 10 से 15 मिनट का अंतर होता है। पूर्णिया में सूरज पहले डूबता है, इसलिए वहां इफ्तार जल्दी होती है।रमजान के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें:नियत (Intention): रोजा रखने और खोलने के समय दुआ पढ़ना सुन्नत माना जाता है।सेहत का ख्याल: इफ्तार के समय बहुत ज्यादा तला-भुना खाने के बजाय खजूर और पानी से रोजा खोलना सुन्नत भी है और सेहत के लिए भी बेहतर है।नमाज और इबादत: रमजान में पांचों वक्त की नमाज के साथ ‘तरावीह’ (Tarawih) की नमाज का विशेष महत्व है।महत्वपूर्ण दुआएं:सहरी की दुआ: “व बि सोमि गदिन नवैतु मिन शहरि रमजान” (अर्थ: मैंने रमजान के कल के रोजे की नियत की)।इफ्तार की दुआ: “अल्लाहुम्मा लका सुमतु व बिका आमंतु व अलयका तवक्कलतु व अला रिज़क़िका अफतरतु” (अर्थ: ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोजा रखा और तेरे ही दिए हुए रिज्क से इफ्तार किया)।
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