
News India Live, Digital Desk: महिलाओं में प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) से जुड़ी कई जटिलताएं होती हैं, जिनमें से एक है आशेरमैन सिंड्रोम (Asherman Syndrome)। अक्सर लोग इसके बारे में जागरूक नहीं होते, जिसके कारण समय पर इलाज नहीं मिल पाता। हालिया मेडिकल शोधों में गर्भनाल स्टेम सेल थेरेपी (Umbilical Cord Stem Cell Therapy) इस गंभीर समस्या के समाधान के रूप में एक नई उम्मीद बनकर उभरी है।आशेरमैन सिंड्रोम क्या है? (Understanding Asherman Syndrome)यह एक दुर्लभ स्थिति है जिसमें गर्भाशय (Uterus) के अंदर ‘स्कार टिश्यू’ (Scar Tissue) या चिपकन (Adhesions) बन जाती है।प्रमुख कारण: अक्सर यह गर्भाशय की सर्जरी (जैसे D&C), संक्रमण या सीजेरियन सेक्शन के बाद होने वाले घावों के कारण होता है।प्रभाव: यह टिश्यू गर्भाशय की दीवारों को आपस में चिपका देते हैं, जिससे गर्भाशय का आकार छोटा हो जाता है और भ्रूण के ठहरने की जगह खत्म हो जाती है।प्रमुख लक्षण (Symptoms)पीरियड्स का बहुत कम आना या पूरी तरह बंद हो जाना (Amenorrhea)।पीरियड्स के समय असहनीय दर्द होना।बार-बार गर्भपात (Miscarriage) होना।कंसीव करने में कठिनाई यानी बांझपन (Infertility)।इलाज में ‘स्टेम सेल थेरेपी’ की भूमिकाआमतौर पर इसका इलाज सर्जरी (Hysteroscopy) से किया जाता है, लेकिन गंभीर मामलों में गर्भाशय की परत (Endometrium) दोबारा नहीं बन पाती। यहीं पर अम्बिलिकल कॉर्ड स्टेम सेल थेरेपी काम आती है:गर्भाशय की परत का पुनर्निर्माण: गर्भनाल (Umbilical Cord) से लिए गए स्टेम सेल्स में शरीर के किसी भी अंग की कोशिका बनाने की अद्भुत क्षमता होती है। ये सेल्स गर्भाशय की खराब हो चुकी लाइनिंग को दोबारा जीवित करने में मदद करते हैं।कैसे काम करता है: इन सेल्स को गर्भाशय में इंजेक्ट किया जाता है, जहाँ ये नए रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) के निर्माण को बढ़ावा देते हैं और स्कार टिश्यू को कम करते हैं।सफलता दर: यह थेरेपी उन महिलाओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो रही है जिनका गर्भाशय पारंपरिक सर्जरी से ठीक नहीं हो पा रहा था।डॉक्टरों की सलाहविशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी महिला को सर्जरी के बाद पीरियड्स में अचानक बदलाव महसूस हो, तो उसे तुरंत गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। समय पर पहचान और नई तकनीकों जैसे स्टेम सेल थेरेपी के जरिए मां बनने का सपना दोबारा सच हो सकता है।
UK News