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Jagdeep Dhankhar: 8 महीने बीत गए पर विदाई नहीं मिली, जयराम रमेश ने पूर्व उपराष्ट्रपति के बहाने सरकार पर साधा निशाना

News India Live, Digital Desk: राज्यसभा में बुधवार को अगले तीन महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले सांसदों के लिए एक भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया। करीब 6 घंटे तक चले इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शिरकत की और सांसदों के योगदान की सराहना की। हालांकि, इस खुशनुमा माहौल के बीच कांग्रेस के दिग्गज नेता और सांसद जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने एक ऐसा मुद्दा उठा दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। जयराम रमेश ने पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) को अब तक औपचारिक विदाई न मिलने पर गहरी चिंता और हैरानी जताई है।जयराम रमेश का तीखा सवाल: “यह चिंता का विषय है”जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि यह बड़े ही ‘अफसोस’ की बात है कि जो व्यक्ति राज्यसभा का सभापति रहा, उसे विदाई देने के लिए सरकार के पास समय नहीं है।जयराम रमेश के बयान की 3 बड़ी बातें:दोहरा मापदंड: “आज राज्यसभा में सांसदों के लिए 6 घंटे का विदाई समारोह हुआ, पीएम भी आए। लेकिन 8 महीने पहले पद छोड़ने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति के लिए कोई कार्यक्रम नहीं हुआ।”अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दावा: रमेश ने अपने पोस्ट में धनखड़ के इस्तीफे को ‘अनिवार्य सेवानिवृत्ति’ (Compulsory Retirement) करार दिया, जिससे एक नया विवाद खड़ा हो गया है।लोकतांत्रिक परंपरा का अपमान: कांग्रेस का तर्क है कि सदन की परंपराओं के अनुसार हर सभापति को सम्मानजनक विदाई मिलनी चाहिए, जो धनखड़ के मामले में अब तक नहीं दिखी है।जुलाई 2025 में अचानक दिया था इस्तीफाबता दें कि जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। आधिकारिक तौर पर इस्तीफे का कारण ‘स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं’ बताया गया था, लेकिन विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस का आरोप रहा है कि उन्हें पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था। विपक्षी नेताओं का दावा है कि किसानों के मुद्दों पर उनके रुख के कारण सरकार के साथ उनके मतभेद बढ़ गए थे।प्रधानमंत्री का सांसदों को संदेश: “राजनीति में फुल स्टॉप नहीं होता”एक तरफ जहां जयराम रमेश ने हमला बोला, वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने विदाई ले रहे सांसदों से भावुक अपील की। पीएम ने कहा कि राजनीति में कोई ‘फुल स्टॉप’ नहीं होता और अनुभव की पूंजी हमेशा देश के काम आती है। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं जैसे शरद पवार और मल्लिकार्जुन खड़गे से सीखने की सलाह भी नए सांसदों को दी।