News India Live, Digital Desk : मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन के पास स्थित मराठा मंदिर थिएटर आज पूरी दुनिया में ‘DDLJ’ के लिए जाना जाता है। 1995 में रिलीज हुई शाहरुख खान और काजोल की यह फिल्म आज भी यहां के सिंगल स्क्रीन पर अपना जादू बिखेर रही है। हालांकि, 19 मार्च 2026 को एक नई फिल्म की वजह से इसके दशकों पुराने शेड्यूल में एक दुर्लभ बदलाव देखा गया है।1. मराठा मंदिर का इतिहासस्थापना: इस थिएटर का उद्घाटन 16 अक्टूबर 1945 (कुछ स्रोतों के अनुसार 1952 में वर्तमान स्वरूप) को हुआ था।शानदार शुरुआत: 1960 में महान फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ का भव्य प्रीमियर यहीं हुआ था, जिसमें मधुबाला की एंट्री के लिए हाथी-घोड़ों का इस्तेमाल किया गया था।वास्तुकला: यह अपने आर्ट-डेको (Art-deco) स्टाइल और शानदार बालकनी सीटों के लिए जाना जाता है, जो पुराने बॉम्बे की याद दिलाता है।2. DDLJ और 30 साल का सफर (The Record Run)रिलीज डेट: 20 अक्टूबर 1995।सबसे लंबा रन: यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में किसी एक थिएटर में सबसे लंबे समय तक चलने वाली फिल्म है (1,500 हफ्तों से अधिक)।टिकट की कीमत: दर्शकों के प्यार को देखते हुए यहां टिकट की कीमतें हमेशा कम रखी गई हैं। वर्तमान में बालकनी का टिकट मात्र ₹50 और ड्रेस सर्कल का ₹30 है।परंपरा: हर दिन सुबह 11:30 बजे का शो DDLJ के लिए आरक्षित रहता है। लोग आज भी ‘पलट…’ और ‘जा सिमरन जा…’ जैसे डायलॉग्स पर तालियां बजाते हैं।3. ताजा अपडेट: 19 मार्च 2026 को बदला शेड्यूल!रणवीर सिंह की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ (Dhurandhar 2) की भारी डिमांड के कारण 30 साल में पहली बार DDLJ के स्लॉट में बदलाव किया गया है:नया समय: 11:30 AM के बजाय अब DDLJ को सुबह 10:00 AM (या कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार और पहले) के स्लॉट में शिफ्ट किया गया है ताकि ‘धुरंधर 2’ के 24-घंटे चलने वाले शोज को जगह मिल सके।ऐतिहासिक बदलाव: यह पहली बार है जब किसी नई फिल्म के ‘Box Office Tsunami’ ने राज-सिमरन के पारंपरिक समय को हिलाया है, हालांकि फिल्म का प्रदर्शन बंद नहीं किया गया है।4. दर्शकों का अनुभव (Viewer Experience)श्रद्धांजलि स्थल: कई लोग इसे ‘सिनेमा का तीर्थ’ मानते हैं। यहां आने वाले दर्शकों में प्रेमी जोड़ों के अलावा वे लोग भी शामिल होते हैं जो 90 के दशक की यादें ताजा करना चाहते हैं।इमोशनल कनेक्ट: जब एक बार थिएटर प्रबंधन ने 1,000 हफ्ते पूरे होने पर फिल्म हटाने का नोटिस लगाया था, तो जनता के भारी विरोध और प्रदर्शन के बाद इसे दोबारा शुरू करना पड़ा।
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