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News India Live, Digital Desk: देश के दक्षिणी राज्य केरल में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच कांग्रेस खेमे में भारी घमासान की खबर है। सूत्रों के मुताबिक, उम्मीदवारों की दूसरी सूची में शामिल नामों को देख राहुल गांधी इस कदर नाराज हुए कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को आनन-फानन में आधी रात को बड़ी बैठक बुलानी पड़ी। बताया जा रहा है कि यह बैठक रात 10:30 बजे शुरू होकर तड़के 2:30 बजे तक चली, जिसमें टिकट बंटवारे के फॉर्मूले पर राहुल गांधी ने सख्त तेवर दिखाए।राहुल गांधी की नाराजगी की असली वजहखबर है कि राहुल गांधी केरल यूनिट द्वारा भेजे गए शुरुआती नामों से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं थे। उनका मानना था कि टिकटों का वितरण केवल राज्य इकाई की पसंद-नापसंद पर नहीं, बल्कि जमीनी फीडबैक और कड़े सर्वे के आधार पर होना चाहिए। राहुल ने साफ शब्दों में कहा कि जिन उम्मीदवारों का प्रदर्शन खराब है या जिनके खिलाफ जनता में नाराजगी है, उन्हें दोबारा मौका देकर पार्टी जोखिम नहीं ले सकती। इसी असंतोष के बाद खड़गे के आवास पर मैराथन मंथन शुरू हुआ।’जातिगत समीकरण और सोशल इंजीनियरिंग’ पर जोरबैठक के दौरान राहुल गांधी ने ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने निर्देश दिए कि टिकटों में जातिगत समीकरण, युवाओं की भागीदारी और महिलाओं के प्रतिनिधित्व का पूरा ध्यान रखा जाए। इसी का नतीजा रहा कि बाद में जारी हुई 92 उम्मीदवारों की लिस्ट में कांग्रेस ने भारी संतुलन साधने की कोशिश की है। इसमें नायर, एझावा और ईसाई समुदायों को साधने के साथ-साथ 50 साल से कम उम्र के 52 युवाओं को मैदान में उतारा गया है।सांसदों को ‘नो एंट्री’: राहुल गांधी का कड़ा फैसलाबैठक में एक और बड़ा फैसला लिया गया जिसने कई दिग्गज नेताओं की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी वर्तमान सांसद (MP) को विधानसभा चुनाव में नहीं उतारा जाएगा। दरअसल, के. सुधाकरण और अडूर प्रकाश जैसे कई बड़े सांसद चुनाव लड़ने की इच्छा जता रहे थे, लेकिन राहुल ने दोटूक कहा कि इससे उपचुनाव का बोझ बढ़ेगा और जनता के बीच गलत संदेश जाएगा। उनके इस फैसले से पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह बढ़ने की भी चर्चा है।खेमेबाजी और महिला प्रतिनिधित्व पर उठे सवालभले ही देर रात चली बैठक में डैमेज कंट्रोल की कोशिश की गई, लेकिन विरोध के स्वर अभी भी सुनाई दे रहे हैं। कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद ने महिलाओं को कम टिकट मिलने पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई है। वहीं, केरल की स्थानीय राजनीति में के.सी. वेणुगोपाल गुट के दबदबे को लेकर भी पार्टी के भीतर सुगबुगाहट तेज है। अब देखना यह होगा कि राहुल गांधी के इस ‘हस्तक्षेप’ और खड़गे की ‘देर रात वाली क्लास’ का असर चुनावी नतीजों पर कैसा पड़ता है।
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