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कॉलेजियम सिस्टम पर सुप्रीम’ मुहर जस्टिस बीआर गवई बोले भारत के लिए यही सबसे बेस्ट, पारदर्शिता पर उठाए जा रहे सवाल गलत

News India Live, Digital Desk: देश में जजों की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई ने बड़ा बयान दिया है। जस्टिस गवई ने मौजूदा ‘कॉलेजियम सिस्टम’ (Collegium System) का पुरजोर समर्थन करते हुए इसे भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे उपयुक्त बताया है। उन्होंने उन आलोचनाओं को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कॉलेजियम प्रणाली को अपारदर्शी या बंद कमरे की प्रक्रिया कहा जाता है। जस्टिस गवई के इस बयान को न्यायपालिका और सरकार के बीच नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर चल रही खींचतान के बीच एक महत्वपूर्ण स्टैंड के रूप में देखा जा रहा है।क्यों है कॉलेजियम सिस्टम सबसे बेहतर? जस्टिस गवई का तर्कएक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम से बेहतर कोई दूसरी व्यवस्था नहीं हो सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में पूरी सावधानी बरती जाती है और उम्मीदवार की योग्यता व सत्यनिष्ठा की गहराई से जांच होती है। जस्टिस गवई ने इस बात पर जोर दिया कि कॉलेजियम सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता बरकरार रहे और इसमें बाहरी हस्तक्षेप न हो। उनके अनुसार, यह सिस्टम समय की कसौटी पर खरा उतरा है।पारदर्शिता के आरोपों पर दिया करारा जवाबअक्सर यह आरोप लगाया जाता है कि कॉलेजियम सिस्टम में जजों का चयन गुपचुप तरीके से होता है। इस पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस गवई ने कहा कि नियुक्तियों के दौरान होने वाली चर्चाओं को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, लेकिन इसका मतलब यह कटई नहीं है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने कहा कि कॉलेजियम के फैसलों के पीछे ठोस कारण और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) जैसी संस्थाओं की रिपोर्ट्स होती हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि सिस्टम में सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है, लेकिन इसे पूरी तरह बदलना समाधान नहीं है।न्यायपालिका की स्वतंत्रता ही लोकतंत्र की पहचानजस्टिस गवई ने अपने संबोधन में कहा कि एक सशक्त लोकतंत्र के लिए न्यायपालिका का स्वतंत्र होना अनिवार्य है। यदि जजों की नियुक्ति की शक्ति पूरी तरह से कार्यपालिका (सरकार) के पास चली जाएगी, तो इससे न्यायिक निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। कॉलेजियम प्रणाली इसी संतुलन को बनाए रखने का कार्य करती है। उन्होंने भावी चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि जजों की संख्या बढ़ाने और लंबित मामलों को निपटाने पर ध्यान देना वर्तमान की सबसे बड़ी जरूरत है।