
तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवार (23 मार्च) को तब हड़कंप मच गया जब निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र पर चुनाव आयोग की जगह भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रदेश इकाई की मुहर लगी पाई गई। इस चूक के बाद सत्ताधारी माकपा (CPI-M) और विपक्षी कांग्रेस ने चुनाव आयोग और बीजेपी के बीच ‘सांठगांठ’ का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है।कैसे खुला राज? माकपा ने सोशल मीडिया पर शेयर किया दस्तावेजयह विवाद उस वक्त सार्वजनिक हुआ जब माकपा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर 19 मार्च के एक पत्र के साथ संलग्न शपथपत्र (Affidavit) की कॉपी साझा की। चौंकाने वाली बात यह थी कि जहाँ चुनाव आयोग की आधिकारिक मुहर होनी चाहिए थी, वहां ‘केरल BJP’ की सील लगी हुई थी। माकपा ने तंज कसते हुए पूछा, “क्या अब बीजेपी ने सारे दिखावे छोड़ दिए हैं? चुनाव आयोग और बीजेपी को एक ही शक्ति केंद्र नियंत्रित कर रहा है, कम से कम दो अलग डेस्क की औपचारिकता तो बनाए रखें।”विपक्षी दलों का हमला: “बटन कोई भी दबाओ, कमल ही निकलता है”माकपा ने आरोप लगाया कि यह दस्तावेज कई राजनीतिक दलों को ईमेल के जरिए आधिकारिक स्रोत से भेजा गया था। पार्टी ने इसकी तुलना ईवीएम के पुराने आरोपों से करते हुए कहा कि यह वैसा ही संयोग है जैसा कहा जाता था कि “बटन कोई भी दबाओ, निकलता कमल ही है।” कांग्रेस ने भी इस मामले में कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।[Image reflecting the controversial letter with BJP seal versus the official Election Commission seal]केरल CEO की सफाई: “यह महज एक लिपिकीय त्रुटि है”विवाद बढ़ता देख केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) रतन यू. केलकर ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से एक ‘लिपिकीय त्रुटि’ (Clerical Mistेक) थी जिसे संज्ञान में आते ही तुरंत सुधार लिया गया था। चुनाव आयोग ने बताया कि त्रुटिपूर्ण दस्तावेज की वापसी का नोटिस सभी राजनीतिक दलों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेज दिया गया है।बड़ी कार्रवाई: असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) निलंबितमामले की गंभीरता को देखते हुए केरल चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने बताया कि संबंधित फाइल का काम देख रहे असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) को जांच पूरी होने तक तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आयोग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि आखिर सरकारी दफ्तर में राजनीतिक दल की मुहर कैसे पहुंची और वह आधिकारिक पत्र पर कैसे लग गई।आखिर कैसे हुई यह बड़ी चूक?केरल के CEO केलकर के अनुसार, बीजेपी की केरल इकाई ने हाल ही में उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास से संबंधित 2019 के दिशानिर्देशों पर स्पष्टीकरण मांगा था। इसी प्रक्रिया के दौरान फाइलों की आवाजाही में मुहरों की अदला-बदली होने की बात कही जा रही है। हालांकि, विपक्षी दल इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार हमले कर रहे हैं।
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