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भारत ने श्रीलंका, बांग्लादेश और मालदीव के लिए खोला तेल का भंडार, पड़ोसी प्रथम नीति की दुनिया में चर्चा

News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण तनाव और युद्ध के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा गया है। ऐसे कठिन समय में भारत ने अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (P पड़ोसी प्रथम) नीति का परिचय देते हुए अपने पड़ोसी देशों श्रीलंका, बांग्लादेश और मालदीव की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। कूटनीतिक कड़वाहटों को किनारे रखकर भारत इन देशों के लिए एक ‘फर्स्ट रेस्पोंडर’ (सबसे पहले मदद पहुँचाने वाला) बनकर उभरा है।श्रीलंका: एक फोन कॉल पर पहुँचा 38,000 MT ईंधनश्रीलंका में तेल की भारी किल्लत के बीच राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात कर मदद मांगी थी। भारत ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मात्र कुछ दिनों के भीतर 38,000 मीट्रिक टन (MT) पेट्रोलियम उत्पाद कोलंबो भेजे, जिसमें 20,000 MT डीजल और 18,000 MT पेट्रोल शामिल है। श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने इस ‘त्वरित समर्थन’ के लिए पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर का आभार व्यक्त किया है।बांग्लादेश: ‘मैत्री पाइपलाइन’ बनी लाइफलाइनराजनीतिक अस्थिरता और ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश ने भी भारत से अतिरिक्त डीजल की मांग की थी। भारत ने नुमालीगढ़-पार्वतीपुर ‘मैत्री पाइपलाइन’ के जरिए हाई-स्पीड डीजल की आपूर्ति को बढ़ाकर बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) के सचिव अंजन कुमार मिश्रा ने भी पुष्टि की है कि भारत ने इस संकट काल में बांग्लादेश को पूरा सहयोग दिया है।मालदीव: बगावत के बाद भी भारत बना ‘ढाल’मालदीव, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है, फरवरी 2026 के बाद से गहरे संकट में था। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के नेतृत्व में कुछ समय की कूटनीतिक तल्खी के बावजूद, भारत ने मानवीय और रणनीतिक आधार पर मालदीव को ईंधन और गैस की आपूर्ति जारी रखी है। मुइज्जू ने भी हालिया संकट के बाद भारत को अपना ‘सबसे भरोसेमंद साझेदार’ बताया है।भारत की रणनीति: ‘क्षेत्रीय शक्ति’ के रूप में उभरता कदPNGRB सचिव ने PHDCCI हाइड्रोकार्बन समिट 2026 में कहा कि “संकट के इस समय में हमें अपने पड़ोसियों की मदद करनी चाहिए।” भारत न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा (20-40 दिनों का भंडार) को मजबूत कर रहा है, बल्कि दक्षिण एशिया के अन्य देशों के लिए भी एक सुरक्षित सप्लाई चेन बना रहा है। भारत ने अपने आयात स्रोतों का विविधीकरण (रूस और वेनेजुएला से तेल लेना) कर इस संकट के असर को कम करने की कोशिश की है।