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Moradabad Mystery: घर बना जेल रिटायर्ड अधिकारी के बंगले में पति-पत्नी की एंट्री बैन, जुड़वां बेटियों पर कैमरों से पहरा

News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसे सुनकर पुलिस भी हैरान रह गई। यहाँ एक रिटायर्ड सरकारी अधिकारी और उनकी पत्नी के बीच विवाद इतना बढ़ गया है कि घर दो हिस्सों में बंट गया है। हालत यह है कि पति और पत्नी एक-दूसरे के कमरे में कदम तक नहीं रख सकते। इतना ही नहीं, पत्नी ने अपनी ही जुड़वां बेटियों की हर हरकत पर नजर रखने के लिए घर के कमरों और कोनों में सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछा दिया है।रेशमा और बेटियों पर सख्त पहरारिपोर्ट्स के अनुसार, रिटायर्ड अधिकारी की पत्नी रेशमा (परिवर्तित नाम) ने घर का माहौल किसी सैन्य छावनी जैसा बना दिया है। पति-पत्नी के बीच बातचीत पूरी तरह बंद है। घर के अंदर के दरवाजों पर ताले लटके रहते हैं और डिजिटल तालों (Digital Locks) का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि एक-दूसरे की गतिविधियों को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सके।बेटियों की प्राइवेसी पर हमलासबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घर में रहने वाली जुड़वां बेटियों की प्राइवेसी पूरी तरह खत्म हो चुकी है। रेशमा ने बेटियों के कमरों में सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं, जिनका एक्सेस उनके पास रहता है।24 घंटे निगरानी: बेटियां कब सोती हैं, किससे बात करती हैं और क्या पढ़ती हैं, रेशमा मोबाइल ऐप के जरिए इसकी पल-पल की मॉनिटरिंग करती हैं।एंट्री बैन: पति को बेटियों से मिलने या उनके कमरे में जाने की इजाजत नहीं है।पुलिस और काउंसलिंग की कोशिशेंयह मामला जब पुलिस तक पहुँचा, तो अधिकारी भी चक्कर में पड़ गए। पारिवारिक परामर्श केंद्र (Family Counseling Centre) के जरिए दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश की गई, लेकिन कड़वाहट इस कदर है कि कोई भी झुकने को तैयार नहीं है।पति का पक्ष: पति का आरोप है कि पत्नी के सख्त स्वभाव और जासूसी की वजह से घर का माहौल नर्क बन गया है और बेटियों का मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है।पत्नी का पक्ष: वहीं पत्नी का दावा है कि वह अपनी बेटियों की सुरक्षा और उनके भविष्य को लेकर चिंतित है, इसलिए उन्हें निगरानी में रख रही है।सामाजिक विशेषज्ञों की रायमनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह का व्यवहार ‘पैरानोइड’ (अत्यधिक अविश्वास) या गहरे मानसिक तनाव का नतीजा हो सकता है। एक ही छत के नीचे रहते हुए अपनों की ही जासूसी करना न केवल रिश्तों को खत्म करता है, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है।