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News India Live, Digital Desk: महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के दिग्गज नेता विजय वडेट्टीवार ने एक विवादित बयान देकर देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। वडेट्टीवार ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हमले का जिक्र करते हुए उसकी तुलना भारत के मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक माहौल से कर दी है। उनके इस बयान के बाद भाजपा ने उन पर तीखा हमला बोला है और इसे नफरत फैलाने वाली राजनीति करार दिया है।वडेट्टीवार का विवादित दावा: ‘जनता के बीच बढ़ रहा है गुस्सा’कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि जिस तरह अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप पर हमला हुआ, वह वहां की जनता के बीच पनप रहे गुस्से का नतीजा था। उन्होंने आगे कहा कि भारत में भी मौजूदा स्थिति कुछ वैसी ही होती जा रही है। वडेट्टीवार के मुताबिक, बेरोजगारी, महंगाई और सरकार की नीतियों के कारण लोगों में भारी असंतोष है, जो किसी भी समय विस्फोटक रूप ले सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि जनता की भावनाओं को नहीं समझा गया, तो देश में अस्थिरता का माहौल बन सकता है।ट्रंप के बहाने केंद्र सरकार पर साधा निशानावडेट्टीवार यहीं नहीं रुके, उन्होंने केंद्र की सत्ताधारी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब राजनीति में संवाद खत्म हो जाता है और केवल तानाशाही चलती है, तो जनता का धैर्य जवाब देने लगता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है, जिससे आम आदमी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। उनके अनुसार, ट्रंप पर हमला एक वैश्विक चेतावनी है जिसे भारत के संदर्भ में भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।भाजपा का पलटवार: ‘हार की हताशा में दे रहे ऐसे बयान’वडेट्टीवार के इस बयान पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि कांग्रेस नेता का यह बयान न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह हिंसा को उकसाने वाला भी है। भाजपा नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी लगातार हो रही चुनावी हार से इतनी बौखला गई है कि अब वह भारत की तुलना उन देशों से कर रही है जहां की परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने वडेट्टीवार से इस बयान के लिए माफी मांगने की मांग की है।देश के सियासी माहौल में गरमाहटविजय वडेट्टीवार के इस बयान ने आगामी चुनावों से पहले महाराष्ट्र और देश की राजनीति में तापमान बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से चुनावी ध्रुवीकरण तेज हो सकता है। जहां कांग्रेस इसे जनता की आवाज बता रही है, वहीं सत्ता पक्ष इसे लोकतंत्र के लिए खतरा करार दे रहा है। अब देखना यह होगा कि इस बयान का असर आने वाले समय में विपक्षी एकता और चुनावी विमर्श पर क्या पड़ता है।
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