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Ghaziabad Case Update: 4 साल की मासूम से दरिंदगी मामले में SIT की बड़ी कार्रवाई, इलाज से मना करने वाले अस्पतालों पर कसेगा शिकंजा

गाजियाबाद: नंदग्राम थाना क्षेत्र में बीते 16 मार्च को हुई चार साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या की रूह कपा देने वाली वारदात ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस सनसनीखेज मामले की निष्पक्ष जांच के लिए गठित की गई विशेष जांच टीम (SIT) ने सोमवार को गाजियाबाद के नंदग्राम पहुंचकर अपनी पड़ताल तेज कर दी है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी मंजिल सैनी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम अब उन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, जहां लापरवाही की बात सामने आई थी।सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अस्पतालों की भूमिका की जांचइस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू इलाज में हुई देरी का है। आरोप है कि घटना के बाद दो अस्पतालों ने घायल मासूम बच्ची का इलाज करने से साफ इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए एसआईटी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उन अस्पतालों की भूमिका की गहराई से जांच की जाए। टीम यह पता लगाएगी कि किन परिस्थितियों में इलाज से मना किया गया और क्या यह सीधे तौर पर मेडिकल लापरवाही का मामला है।पुलिस पर उत्पीड़न के आरोप और SIT की चौकसीपीड़ित पिता ने न्याय की गुहार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने गाजियाबाद पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। याचिका के अनुसार, पुलिस ने न केवल पीड़ित परिवार बल्कि उनके पड़ोसियों को भी मानसिक रूप से परेशान किया। एसआईटी अब इन सभी पहलुओं की जांच करेगी ताकि सच सामने आ सके और किसी भी बेगुनाह को पुलिसिया उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।सच्चाई की तलाश में मंजिल सैनी की टीमआईपीएस मंजिल सैनी के नेतृत्व वाली इस टीम ने सोमवार को इलाके का दौरा कर कई अहम जानकारियां जुटाईं। हालांकि, जांच की गोपनीयता को देखते हुए पुलिस और एसआईटी ने फिलहाल मीडिया से कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही इस जांच से न केवल दरिंदों को सजा मिलेगी, बल्कि व्यवस्था में मौजूद उन खामियों को भी उजागर किया जाएगा जिनकी वजह से मासूम को समय पर इलाज नहीं मिल सका।क्या है पूरा मामला?बता दें कि 16 मार्च को नंदग्राम में एक मासूम के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले ने पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब एसआईटी की इस सक्रियता से पीड़ित परिवार को इंसाफ की नई उम्मीद जगी है।