
News India Live, Digital Desk: अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के ‘डी-कंपनी’ नेटवर्क को एक और बड़ा झटका लगा है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और तुर्की की नेशनल इंटेलिजेंस ऑर्गेनाइजेशन के एक साझा ऑपरेशन में कुख्यात ड्रग माफिया सलीम इस्माइल डोला (Salim Dola) को इस्तांबुल से गिरफ्तार कर लिया गया है। करीब एक दशक से फरार चल रहे डोला को पकड़ने के लिए इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। अब उसे भारत प्रत्यर्पित (Extradition) करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।5000 करोड़ का ड्रग सिंडिकेट और दाऊद कनेक्शन सलीम डोला को अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी का मास्टरमाइंड माना जाता है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के ड्रग नेटवर्क का संचालन कर रहा था। डोला मुख्य रूप से सिंथेटिक ड्रग्स, खासकर ‘मेफेड्रोन’ (MD) के उत्पादन और सप्लाई में शामिल था। दाऊद इब्राहिम के करीबी इकबाल मिर्ची की मौत के बाद, डोला ने ही डी-कंपनी के नारकोटिक्स विभाग की कमान संभाली थी। उसके तार महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश के साथ-साथ यूएई और तुर्की तक फैले हुए हैं।फर्जी पहचान के साथ तुर्की में छिपा था डोला डोला पिछले कई सालों से दुबई और तुर्की को अपना ठिकाना बनाए हुए था। इस्तांबुल के बेयलिकडुजु (Beylikdüzü) जिले में वह यूएई की फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने उसकी लोकेशन ट्रैक की और तुर्की की सुरक्षा एजेंसियों के साथ जानकारी साझा की, जिसके बाद उसे दबोच लिया गया। डोला पर भारत में NDPS एक्ट के तहत 10 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज हैं।बेटे के डिपोर्ट होने के बाद टूटा नेटवर्क सलीम डोला के पतन की शुरुआत पिछले साल ही हो गई थी, जब उसके बेटे ताहिर डोला को यूएई से डिपोर्ट कर भारत लाया गया था। ताहिर से पूछताछ में एनसीबी (NCB) और मुंबई पुलिस को डोला के ठिकानों और उसके ड्रग सिंडिकेट के बारे में अहम सुराग मिले थे। सांगली और सूरत में पकड़ी गई करोड़ों की ड्रग्स फैक्ट्री के पीछे भी डोला का ही दिमाग बताया जाता है।भारत के लिए क्यों अहम है यह गिरफ्तारी? सलीम डोला की गिरफ्तारी से न केवल ड्रग तस्करी पर लगाम लगेगी, बल्कि टेरर फंडिंग (Terror Funding) के रास्तों का भी खुलासा होगा। एजेंसियों को उम्मीद है कि डोला से पूछताछ में दाऊद इब्राहिम के मौजूदा ठिकानों और डी-कंपनी के नए गुर्गों के बारे में कई चौंकाने वाली जानकारियां मिल सकती हैं।
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