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ट्रंप के आगे नहीं झुकेंगे ईरान ने होर्मुज खोलने के लिए रखीं 3 बड़ी शर्तें, क्या मान जाएगी अमेरिका?

News India Live, Digital Desk : पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध और तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव खेला है। दुनिया की ‘ऊर्जा धमनी’ कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपना शिकंजा कसने के बाद, ईरान ने अब इसे दोबारा खोलने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने तीन सख्त शर्तें रखी हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका की आर्थिक नाकेबंदी के आगे घुटने टेकने को तैयार नहीं है और परमाणु वार्ता से पहले इन शर्तों का पूरा होना अनिवार्य है।ईरान की वो 3 शर्तें, जिन्होंने बढ़ाई ट्रंप की टेंशन रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक अपना प्रस्ताव पहुंचाया है। ये शर्तें कुछ इस प्रकार हैं:आर्थिक नाकेबंदी का खात्मा: अमेरिका तत्काल प्रभाव से ईरान और उसके बंदरगाहों पर लगाई गई सैन्य और आर्थिक नाकेबंदी को हटाए।तेल निर्यात की आजादी: ईरानी तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी रोक-टोक और खतरे के स्वतंत्र रूप से आने-जाने दिया जाए।युद्ध की समाप्ति: पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष को पूरी तरह से रोका जाए। ईरान का प्रस्ताव है कि परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) पर चर्चा इन शर्तों के पूरा होने के बाद अगले चरण में की जा सकती है।होर्मुज की नाकेबंदी से हिला वैश्विक बाजार होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का लगभग 20% हिस्सा कवर करता है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने इस रास्ते को काफी हद तक नियंत्रित कर रखा है। इसका नतीजा यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में 50% अधिक है।ट्रंप का कड़ा रुख और ‘सीधे नियंत्रण’ की धमकी इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस प्रस्ताव पर फिलहाल कोई सकारात्मक रुख नहीं दिखाया है। ट्रंप ने पहले ही दावा किया था कि वे होर्मुज को जबरन खुलवाएंगे और जरूरत पड़ी तो अमेरिका इस समुद्री रास्ते पर सीधे नियंत्रण कर लेगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य बल का प्रयोग करने पर तेल की कीमतें 150 डॉलर के पार जा सकती हैं, जो ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा रिस्क होगा।रूस और भारत की भूमिका ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची इस सिलसिले में रूस का दौरा कर चुके हैं, जहाँ उन्हें राष्ट्रपति पुतिन का समर्थन मिला है। दूसरी ओर, ईरान ने भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे मित्र देशों के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने में कुछ रियायतें दी हैं, लेकिन पूर्ण संचालन के लिए अमेरिका के साथ समझौता होना जरूरी है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप इन शर्तों को मानकर युद्ध विराम की ओर कदम बढ़ाएंगे या फिर तनाव और गहराएगा।