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Trump vs Iran : भारत में फिर लग सकती है महंगाई की आग, ट्रंप के एक फैसले से आसमान छू सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

News India Live, Digital Desk: दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका की सत्ता संभालते ही डोनाल्ड ट्रंप के कड़े फैसलों ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है। ट्रंप और ईरान के बीच गहराते परमाणु विवाद (Nuclear Deal) का सीधा असर अब भारत के आम आदमी की जेब पर पड़ता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप ने ईरान पर फिर से कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होगी, जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।ईरान पर ‘मैक्सिमम प्रेशर’ और तेल का खेलडोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते के कड़े आलोचक रहे हैं। अपने नए कार्यकाल में वे फिर से ‘मैक्सिमम प्रेशर’ की रणनीति अपना सकते हैं। ईरान दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में से एक है। यदि ट्रंप प्रशासन ईरानी तेल के निर्यात पर रोक लगाता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कमी हो जाएगी। मांग और आपूर्ति के इस असंतुलन से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिसका खामियाजा भारत जैसे तेल आयातक देशों को भुगतना पड़ेगा।भारत के लिए क्यों है यह ‘डबल झटका’?भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो भारत का व्यापार घाटा बढ़ जाता है और रुपया कमजोर होता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का मतलब है—माल ढुलाई का महंगा होना। इससे फल, सब्जी और अनाज जैसी बुनियादी चीजों के दाम भी बढ़ जाते हैं। यानी ट्रंप और ईरान की यह सियासी जंग भारत में चौतरफा महंगाई (Inflation) लेकर आ सकती है।क्या मोदी सरकार निकाल पाएगी कोई बीच का रास्ता?भारत के लिए यह स्थिति किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। एक तरफ अमेरिका के साथ मजबूत रणनीतिक रिश्ते हैं, तो दूसरी तरफ अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की चुनौती। भारत ने पहले भी चाबहार पोर्ट और तेल आयात को लेकर अमेरिका से छूट हासिल की थी, लेकिन ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत इस बार छूट मिलना आसान नहीं होगा। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या ट्रंप बातचीत के जरिए कोई समाधान निकालते हैं या फिर तेल की कीमतों में लगी यह आग वैश्विक अर्थव्यवस्था को झुलसा देगी।