
News India Live, Digital Desk: हाल के दिनों में राजनयिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि क्या BRICS (ब्रिक्स) के एक विशेष प्रस्ताव को लेकर भारत के पुराने और भरोसेमंद दोस्त रूस और ईरान नाराज हो गए हैं। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए स्थिति स्पष्ट की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि रणनीतिक मतभेदों का मतलब संबंधों में कड़वाहट नहीं होता।विवाद की जड़: BRICS प्रस्ताव (The BRICS Proposal)विवाद मुख्य रूप से BRICS समूह के विस्तार और नई मुद्रा (Currency) या व्यापार प्रणाली को लेकर आए प्रस्तावों से जुड़ा था:विस्तार की गति: रूस और ईरान BRICS के तेजी से विस्तार और पश्चिम-विरोधी ब्लॉक के रूप में इसकी पहचान मजबूत करने के पक्ष में रहे हैं।भारत का रुख: भारत ने हमेशा ‘मानदंड-आधारित विस्तार’ (Criteria-based expansion) की वकालत की है। भारत का मानना है कि नए देशों को शामिल करने से पहले सर्वसम्मति और स्पष्ट नियम होने चाहिए।मुद्रा का मुद्दा: डॉलर के विकल्प के रूप में नई ब्रिक्स मुद्रा लाने के प्रस्ताव पर भारत का रुख थोड़ा सतर्क रहा है, जबकि रूस और ईरान इस प्रक्रिया में तेजी चाहते हैं।सरकार का जवाब: क्या वाकई नाराजगी है? (Government’s Response)विदेश मंत्रालय (MEA) के सूत्रों और सरकारी प्रतिनिधियों ने इन खबरों को ‘निराधार’ बताया है। सरकार की ओर से निम्नलिखित बिंदु रखे गए हैं:स्वतंत्र विदेश नीति: भारत अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेता है। ब्रिक्स में भारत का रुख किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि समूह की स्थिरता के लिए है।रूस के साथ अटूट संबंध: सरकार ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन संकट और ऊर्जा व्यापार के दौरान भारत और रूस के संबंध और मजबूत हुए हैं। एक प्रस्ताव पर अलग राय होने से दशकों पुरानी दोस्ती पर असर नहीं पड़ता।ईरान के साथ रणनीतिक साझेदारी: चाबहार पोर्ट और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) पर ईरान के साथ काम जारी है। ब्रिक्स के मंच पर चर्चाएं एक सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।आम सहमति (Consensus): ब्रिक्स एक ऐसा संगठन है जो आम सहमति से काम करता है। भारत का प्रयास केवल यह सुनिश्चित करना है कि सभी सदस्यों के हितों की रक्षा हो।विशेषज्ञों का विश्लेषण: सामरिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy)भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस समय ‘सामरिक स्वायत्तता’ की नीति पर चल रहा है:भारत एक तरफ अमेरिका और पश्चिम के साथ क्वाड (QUAD) जैसे समूहों में है।दूसरी तरफ रूस, चीन और ईरान के साथ ब्रिक्स और एससीओ (SCO) में भी सक्रिय है।ऐसे में हितों का टकराव होना स्वाभाविक है, जिसे सरकार ‘नेगोशिएशन’ (वार्ता) के जरिए सुलझा रही है।
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