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उत्तर प्रदेश टीजीटी परीक्षा में बड़ा एक्शन! लखनऊ, जौनपुर और चित्रकूट में दबोचे गए 4 शातिर मुन्नाभाई

उत्तर प्रदेश में कड़े सुरक्षा इंतजामों और प्रशासनिक मुस्तैदी के दावों के बीच आयोजित हुई टीजीटी (TGT) परीक्षा में सेंध लगाने की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया गया है। प्रदेश के तीन अलग-अलग जिलों— राजधानी लखनऊ, जौनपुर और चित्रकूट में चेकिंग के दौरान हड़कंप मच गया जब सॉल्वर गैंग के चार शातिर गुर्गे रंगे हाथों दबोचे गए। ये 'मुन्नाभाई' असली अभ्यर्थियों से मोटी रकम ऐंठकर उनकी जगह परीक्षा हॉल में बैठकर पेपर सॉल्व कर रहे थे। बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और कड़े चेकिंग अभियान के चलते इन जालसाजों की चालाकी धरी की धरी रह गई। इस बड़े खुलासे के बाद पुलिस और एसटीएफ की टीमें अब इस रैकेट के मास्टरमाइंड की तलाश में जुट गई हैं। राजधानी लखनऊ के परीक्षा केंद्र पर ऐसे दबोचा गया पहला सॉल्वर फर्जीवाड़े का पहला मामला राजधानी लखनऊ के एक प्रतिष्ठित परीक्षा केंद्र से सामने आया। यहां परीक्षा शुरू होने के बाद जब स्टेटिक मजिस्ट्रेट और केंद्र व्यवस्थापक की टीम अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड और थंब इम्प्रेशन (बायोमेट्रिक) का मिलान कर रही थी, तब एक युवक की हरकतों पर शक हुआ। जब उसके दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई, तो फोटो और फिंगरप्रिंट असली अभ्यर्थी से मेल नहीं खाए। पुलिस की कड़ी पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि वह एक लाख रुपये एडवांस लेकर दूसरे छात्र के भविष्य से खिलवाड़ करने परीक्षा देने बैठा था। पुलिस ने मुन्नाभाई को तुरंत हिरासत में ले लिया और केंद्र पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जौनपुर और चित्रकूट में भी मुन्नाभाइयों का खेल हुआ पूरी तरह से फ्लॉप लखनऊ की तरह ही जौनपुर और चित्रकूट जिलों में भी सॉल्वर गैंग के गुर्गों ने परीक्षा में सेंध लगाने की पूरी तैयारी की थी, लेकिन वे प्रशासन की पैनी नजरों से बच नहीं सके। जौनपुर के एक सेंटर पर चेकिंग के दौरान दो संदिग्ध युवकों को पकड़ा गया, जो खुद को असली परीक्षार्थी बताकर परीक्षा देने की जिद कर रहे थे। कड़ाई से पूछताछ करने पर उनके पास से फर्जी पहचान पत्र और जाली दस्तावेज बरामद हुए। वहीं, चित्रकूट में भी एक सॉल्वर को परीक्षा कक्ष के भीतर से ही गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए ये सभी आरोपी बेहद शातिर तरीके से असली अभ्यर्थियों के हुलिए से मिलती-जुलती फोटो तैयार कर परीक्षा में बैठे थे, ताकि किसी को शक न हो। मोटी रकम लेकर चल रहा था सरकारी नौकरी लगवाने का रैकेट पुलिस की शुरुआती जांच और पूछताछ में यह बात सामने आई है कि यह पूरा खेल एक संगठित सॉल्वर गैंग द्वारा संचालित किया जा रहा था। यह गैंग बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये की डील करता था। डील पक्की होने के बाद, गैंग के पढ़े-लिखे शूटरों या सॉल्वरों को मोटी रकम और एडवांस देकर परीक्षा केंद्रों पर भेजा जाता था। पकड़े गए मुन्नाभाइयों के पास से कई मोबाइल फोन, फर्जी एडमिट कार्ड और संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनकी जांच साइबर सेल और एसटीएफ (STF) द्वारा की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के बैंक खातों और कॉल डिटेल्स को खंगाला जा रहा है ताकि इस गिरोह की जड़ों तक पहुंचा जा सके। सख्त सुरक्षा घेरे और बायोमेट्रिक जांच ने बिगाड़ा सॉल्वर गैंग का प्लान उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और प्रशासन ने इस बार टीजीटी परीक्षा को शुचितापूर्ण ढंग से कराने के लिए अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी के साथ-साथ जैमर लगाए गए थे ताकि कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस काम न कर सके। लेकिन इस बार सॉल्वर गैंग की हार की सबसे बड़ी वजह बनी 'सख्त बायोमेट्रिक और फेस रिकग्निशन जांच'। जैसे ही इन मुन्नाभाइयों ने सिस्टम पर अपने अंगूठे लगाए, कंप्यूटर ने धोखाधड़ी को पकड़ लिया। प्रशासन का कहना है कि पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ संबंधित थानों में गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जा रहा है, और जिन असली अभ्यर्थियों की जगह ये परीक्षा दे रहे थे, उन्हें भी परीक्षा से डिबार (प्रतिबंधित) कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।