
वैश्विक महाशक्तियों के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच रूस ने समंदर की गहराइयों में अपनी ऐसी ताकत को तैनात कर दिया है जिससे पश्चिमी देशों और नाटो (NATO) गठबंधन के खेमे में जबरदस्त खलबली मच गई है। रूस की इस नई और बेहद आधुनिक परमाणु पनडुब्बी को सैन्य विशेषज्ञ समंदर का 'प्रलयास्त्र' और नाटो के लिए 'यमदूत' कह रहे हैं। यह पनडुब्बी इतनी ज्यादा खतरनाक और साइलेंट है कि गहरे पानी में इसके मूवमेंट का पता लगा पाना दुनिया के सबसे एडवांस्ड राडार प्रणालियों के लिए भी नामुमकिन साबित हो रहा है। गहरे समंदर से पलक झपकते ही काल बनकर बरसेगी यह सबमरीन इस रूसी पनडुब्बी की मारक क्षमता और इसकी तकनीक इतनी अचूक है कि यह किसी भी युद्ध का रुख अकेले ही पलटने का माद्दा रखती है। समंदर की अगाध गहराइयों में पूरी तरह शांत रहकर चलने वाली यह सबमरीन अपने साथ रूस की सबसे आधुनिक हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलों को लेकर चलती है। इस पनडुब्बी की सबसे बड़ी खौफनाक बात यह है कि यह समंदर के भीतर से ही 1000 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद दुश्मन के किसी भी सैन्य ठिकाने, शहर या एयरक्राफ्ट करियर को महज 5 मिनट के भीतर पूरी तरह से तबाह कर सकती है। नाटो देशों की राडार तकनीक भी इसके सामने पड़ गई फीकी आखिर इस पनडुब्बी को नाटो के लिए यमदूत क्यों कहा जा रहा है, इसके पीछे इसकी बेहद खास स्टील्थ तकनीक है। रूस ने इस पनडुब्बी के बाहरी ढांचे को एक विशेष प्रकार के रबर और केमिकल कोटिंग से कवर किया है, जो दुश्मन के सोनार और राडार सिग्नलों को सोख लेती है। इसके चलते जब यह पानी के नीचे चलती है, तो इसकी आवाज बिल्कुल न के बराबर होती है। नाटो के सैन्य कमांडरों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर रूस के साथ कभी सीधा टकराव होता है, तो उन्हें इस बात की भनक भी नहीं लगेगी कि मौत किस दिशा से आ रही है। अचूक मिसाइलों और परमाणु हथियारों से लैस है रूस का यह 'साइलेंट किलर' रूसी नौसेना का यह प्रलयास्त्र केवल छिपने में ही माहिर नहीं है, बल्कि हथियारों के मामले में भी यह एक तैरता हुआ बारूद का ढेर है। इस पनडुब्बी में रूस की सबसे घातक जिरकॉन (Zircon) हाइपरसोनिक मिसाइलें और कलिब्र (Kalibr) क्रूज मिसाइलें तैनात की गई हैं। ये मिसाइलें न केवल पारंपरिक बारूद, बल्कि जरूरत पड़ने पर परमाणु हथियार ले जाने में भी पूरी तरह सक्षम हैं। इसकी हाइपरसोनिक मिसाइलों की रफ्तार इतनी तेज है कि दुनिया का कोई भी मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम या मिसाइल शील्ड इन्हें हवा में रोकने की ताकत नहीं रखता है। यूक्रेन युद्ध और वैश्विक तनाव के बीच पुतिन का सबसे बड़ा दांव रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा समंदर में इस पनडुब्बी की सक्रियता को बढ़ाना सीधे तौर पर अमेरिका और पश्चिमी देशों को एक सख्त चेतावनी माना जा रहा है। यूक्रेन संकट के बाद से ही नाटो देश लगातार रूस की सीमाओं के करीब अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। ऐसे में रूस ने अपने इस सबसे बड़े साइलेंट किलर को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर तैनात करके यह साफ संदेश दे दिया है कि यदि रूस की संप्रभुता पर कोई आंच आई, तो समंदर की गहराइयों से उठने वाला यह तूफान तबाही मचाने में जरा भी देर नहीं करेगा।
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