
दुनिया के सबसे संवेदनशील और व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आए दिन होने वाले भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के खतरों ने हमेशा से भारत की चिंताएं बढ़ाई हैं। वैश्विक स्तर पर जब भी इस रूट पर कोई संकट आता है, तो भारत की कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा मंडराने लगता है। इसी अनिश्चितता और जोखिम को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए भारत सरकार ने एक बेहद गोपनीय और रणनीतिक मास्टरप्लान पर काम शुरू कर दिया है। इस अभूतपूर्व कदम के जरिए भारत अपनी ऊर्जा निर्भरता के रूट को डाइवर्सिफाई करने और संकट के समय के लिए एक अचूक बैकअप सिस्टम तैयार करने जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मची उथल-पुथल का देश की अर्थव्यवस्था पर कोई विपरीत असर न पड़े।
40,000 करोड़ रुपये का मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, सामरिक भंडारण क्षमता में होगी भारी बढ़ोतरी इस महायोजना को हकीकत में बदलने के लिए भारत सरकार ने लगभग 40,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट का खाका तैयार किया है। इस विशाल फंड का इस्तेमाल देश के भीतर रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (Strategic Petroleum Reserves – SPR) के दूसरे चरण को विकसित करने और नए अत्याधुनिक एलएनजी टर्मिनल्स बनाने में किया जाएगा। योजना के तहत देश के तटीय और सुरक्षित इलाकों में विशाल भूमिगत गुफाएं (Underground Rock Caverns) बनाई जाएंगी, जहां लाखों टन कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस को सुरक्षित स्टोर करके रखा जा सके। यह इंफ्रास्ट्रक्चर इतना विशाल होगा कि किसी भी बड़े वैश्विक युद्ध या समुद्री मार्ग के बंद होने की स्थिति में भी भारत महीनों तक बिना किसी बाहरी मदद के अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को सुचारू रूप से पूरा कर सकेगा।
कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होगी पूरी तरह सुरक्षित, आम जनता और उद्योगों को मिलेगा बड़ा फायदा भारत की इस दूरदर्शी और महात्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद देश में तेल और गैस की किल्लत का डर हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। घरेलू स्तर पर पर्याप्त स्टॉक होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले अचानक उतार-चढ़ाव से भारतीय उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और देश में पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस के दाम स्थिर रखे जा सकेंगे। इसके साथ ही, भारत की इस बढ़ती ताकत से वैश्विक मंच पर देश की साख और मजबूत होगी। ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में उठाए गए इस कदम को कॉर्पोरेट जगत और रक्षा विश्लेषक भारत का अब तक का सबसे बड़ा और गेम-चेंजर रणनीतिक फैसला मान रहे हैं।
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