
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है। अमेरिकी प्रशासन ने तकनीकी क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एआई को अपना नया सुरक्षा कवच और डिजिटल हथियार घोषित कर दिया है। इसी रणनीति के तहत ट्रंप सरकार ने देश की अग्रणी टेक कंपनियों में शुमार एंथ्रोपिक (Anthropic) के अब तक के सबसे शक्तिशाली और एडवांस एआई मॉडल पर कड़े प्रतिबंध (Ban) लगा दिए हैं। इस अप्रत्याशित और कड़े कदम ने वैश्विक टेक इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया है, क्योंकि एंथ्रोपिक के इन मॉडल्स को ओपनएआई के चैटजीपीटी का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी माना जाता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील डेटा लीक होने का डर वाशिंगटन से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप सरकार के इस बेहद कड़े और अचानक लिए गए फैसले के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा का एक बहुत बड़ा डर छिपा हुआ है। खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी थी कि एंथ्रोपिक का यह नया और सबसे ताकतवर मॉडल इतना एडवांस है कि इसका इस्तेमाल संवेदनशील साइबर ऑपरेशन्स, खतरनाक कोड्स विकसित करने या देश की गोपनीय रणनीतियों को डिकोड करने के लिए किया जा सकता है। सरकार को सबसे बड़ा डर इस बात का है कि यदि यह तकनीक किसी भी तरह से विदेशी प्रतिद्वंद्वियों या हैकर्स के हाथ लग गई, तो यह देश की संप्रभुता और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बड़ा विनाशकारी खतरा बन सकती है।
अवैध इस्तेमाल और एआई के मिलिट्री कंट्रोल पर ट्रंप प्रशासन की नजर अमेरिकी सरकार एआई तकनीकों के मिलिट्री और डिफेंसिव इस्तेमाल को लेकर बेहद गंभीर है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि जो भी देश सुपर-एडवांस एआई पर कंट्रोल रखेगा, आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और रक्षा क्षेत्र में उसी का बोलबाला होगा। एंथ्रोपिक के मॉडल पर यह कार्रवाई इसलिए भी की गई है ताकि इसके कमर्शियल इस्तेमाल के जरिए कोई भी अनधिकृत देश या संगठन अमेरिकी धरती पर विकसित इस महा-तकनीक का दुरुपयोग न कर सके। व्हाइट हाउस के सूत्रों का कहना है कि सरकार अब केवल उन्हीं मॉडल्स को पूरी तरह से अनुमति देगी जो अमेरिकी सरकार के कड़े सुरक्षा मानकों और साइबर गाइडलाइंस पर 100% खरे उतरेंगे।
टेक कंपनियों में मची खलबली, रेगुलेशंस के नए दौर की शुरुआत एंथ्रोपिक पर लगे इस प्रतिबंध के बाद सिलिकॉन वैली की अन्य दिग्गज टेक कंपनियों जैसे ओपनएआई, गूगल और मेटा के बीच भी बेचैनी काफी बढ़ गई है। ट्रंप सरकार के इस कड़े रुख से यह साफ संदेश गया है कि अब एआई मॉडल्स के डेवलपमेंट में कंपनियों की मनमर्जी नहीं चलेगी और उन्हें हर कदम पर सरकारी नियमों का पालन करना होगा। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह प्रतिबंध केवल एक शुरुआत है और आने वाले दिनों में अमेरिका समेत दुनिया के कई बड़े देश सुपर-एडवांस एआई मॉडल्स को पूरी तरह से रेगुलेट या अपने नियंत्रण में लेने के लिए और भी बड़े नीतिगत बदलाव कर सकते हैं।
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