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भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के कृषि मंत्रियों की 16वीं बैठक मध्य प्रदेश के इंदौर में संपन्न

भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के कृषि मंत्रियों की 16वीं बैठक 12 और 13 जून, 2026 को मध्य प्रदेश के इंदौर में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

कृषि पर ब्रिक्स के कार्य समूह ने पिछले लगभग 3 महीनों में अनेक बैठकों के जरिए 4 प्राथमिकताओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया है।

प्राथमिकता 1. खाद्य सुरक्षा, पोषण और आजीविका

प्राथमिकता 2. कृषि व्यापार और सहयोग

प्राथमिकता 3. नवीकरणीय खेती, जलवायु के अनुकूल और संवहनीय कृषि

प्राथमिकता 4. नवोन्मेष के उद्देश्य से सहयोग का सुदृढ़ीकरण तथा कृषि और खाद्य प्रणाली को भविष्य के लिए तैयार करने के वास्ते निवेश

बैठक का समापन ब्रिक्स के कृषि मंत्रियों के संयुक्त घोषणापत्र को सर्वसम्मति से पारित किए जाने के साथ हुआ। यह घोषणापत्र सदस्य देशों के सामूहिक दृष्टिकोण और साझा प्रतिबद्धताओं तथा उनके बीच विस्तृत विचार-विमर्श के जरिए बनी सहमति को प्रतिबिंबित करता है।

(लिंकः https://d2jiw2zrmmyqt8.cloudfront.net/wp-content/uploads/2026/06/13131357/agriculture-doc.pdf)

संयुक्त घोषणा पत्र में किसान-केंद्रित दृष्टिकोण पर विशेष जोर दिया गया है, इसमें किसानों की अहम भूमिका को मान्यता दी गई है—खासकर वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में छोटे किसानों की भूमिका, संवहनीय खेती के तरीकों को बढ़ावा देने और समावेशी ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करने में किसानों, विशेषकर छोटे किसानों की केंद्रीय भूमिका को स्वीकार किया गया है। साथ ही, यह घोषणापत्र ब्रिक्स सदस्य देशों की उस साझा सोच को भी दिखाता है जिसके तहत नवोन्मेष, संवहनीयता और न्यायसंगत हिस्सेदारी के जरिये कृषि और खाद्य व्यवस्था को मज़बूत बनाने पर ज़ोर दिया गया है। अपने सामूहिक संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए, मंत्रियों ने इन चार प्रमुख परिणामों को आगे ले जाने पर सहमति व्यक्त की:

घोषणा पत्र की पहली प्रमुख विशेषता आईसीएआर-भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (आईआईएफएसआर), मोदीपुरम, भारत द्वारा प्रारंभिक समन्वय के साथ कृषि पारिस्थितिकी (एग्रोइकोलॉजी) और पुनर्योजी कृषि (रीजनरेटिव एग्रीकल्चर)  पर उत्कृष्टता केंद्रों का ब्रिक्स नेटवर्क स्थापित करने का समझौता है। यह पहल संवहनीय, प्राकृतिक और जलवायु-अनुकूल खेती के तरीकों को बढ़ावा देगी। आईसीएआर-आईआईएफएसआर, भारत में प्राकृतिक खेती पर उत्कृष्टता केंद्र के रूप में काम करेंगे, जो सदस्य देशों में सहयोगात्मक अनुसंधान, क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम पद्धतियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा।

दूसरा, प्रौद्योगिकी-संचालित कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सदस्य देश ‘डिजिटल कृषि पर एक नेटवर्क’ स्थापित करने पर भी सहमत हुए। यह प्लेटफॉर्म कृत्रिम मेधा, भू-स्थानिक (जियोस्पेशियल) प्रौद्योगिकियों, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और डेटा-संचालित कृषि समाधानों में सहयोग को बढ़ावा देगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली इस नेटवर्क के शुरुआती समन्वय का नेतृत्व करेगा, जो आधुनिक तकनीकों को किसानों के लिए व्यावहारिक और उपयोगी कृषि तरीकों से जोड़ने का काम करेगा।

तीसरा प्रमुख परिणाम ‘बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों का वैश्विक मंच’ की शुरुआत है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान, बीज विरासत और किसानों के योगदान को स्वीकार करते हुए उनके अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें बढ़ावा देना है। नई दिल्ली में ‘पौधों की किस्मों और किसान अधिकार संरक्षण प्राधिकरण’ (पीपीवी&एफआरए) के माध्यम से भारत द्वारा शुरू में समन्वित की जाने वाली इस पहल से इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर वैश्विक संवाद और सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।

चौथा, ब्रिक्स सदस्य देश बीज, कृषि इनपुट्स और आनुवंशिक संसाधनों में सहयोग को मजबूत करने के लिए ‘ब्रिक्स एग्रिन’ (एग्रो-इनपुट्स, जेनेटिक रिसोर्सेज एंड इंफॉर्मेशन नेटवर्क) फ्रेमवर्क स्थापित करने पर भी सहमत हुए। यह फ्रेमवर्क ब्रिक्स देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण और साझेदारी को सुगम बनाएगा।

सदस्य देशों के कृषि मंत्रियों ने दो मौजूदा पहलों को और मजबूत करने पर भी सहमति व्यक्त की। सबसे पहले, ब्रिक्स सदस्य ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच (बीएआरपी) को मजबूत करने और इसे एक गतिशील “नॉलेज-टू-एक्शन हब” (ज्ञान को कार्य में बदलने वाले केंद्र) के रूप में बदलने पर सहमत हुए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि अनुसंधान के परिणामों को किसानों के लिए व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर लागू होने वाले समाधानों में प्रभावी ढंग से बदला जा सके।

दूसरा, कृषि व्यापार के क्षेत्र में, ब्रिक्स देशों ने एक निष्पक्ष, न्यायसंगत, समावेशी और पारदर्शी बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। भारत द्वारा आयोजित ‘ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज’ (ब्रिक्स अनाज  आदानप्रदान) पर विशेष संवाद ने इन चर्चाओं को महत्वपूर्ण गति प्रदान की और इसके इसके कामकाज से जुड़े पहलुओं पर साझा समझ बनाने में मदद की।

सदस्य देश संवहनीय और भविष्य के अनुकूल कृषि प्रणालियों के निर्माण के लिए जलवायु-अनुकूल एवं पुनर्योजी कृषि, जैव विविधता संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और नवाचार के साथ-साथ मत्स्य पालन तथा पशुपालन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए। सदस्य  देश दक्षता, पोषण सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने के लिए भविष्य के कार्यक्रमों में खाद्य नुकसान में कमी, पशुधन प्रौद्योगिकियों और जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) पर तकनीकी बातचीत के नतीजों को शामिल करने पर भी सहमत हुए।

ब्रिक्स सदस्यों ने तकनीकी आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और कृषि कौशल विकास को बढ़ावा देकर विकासशील देशों के सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, जिससे विकासशील देशों में खाद्य सुरक्षा और संवहनीय कृषि का समर्थन करने में सामूहिक भूमिका को और मजबूती मिली।

“छोटे किसान, महिलाएं और युवा: खाद्य सुरक्षा का भविष्य संवारना” विषय पर एक मंत्री-स्तरीय बातचीत भी आयोजित की गई, जिसमें समावेशी, मज़बूत और संवहनीय खाद्य प्रणालियां बनाने में छोटे किसानों, महिलाओं और युवाओं की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया गया। प्रतिनिधियों ने इन समूहों के लिए बाज़ार, वित्त, प्रोद्यौगिकी और क्षमता निर्माण को बेहतर बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

इस बैठक से भाग लेने वाले देशों के बीच बाज़ार तक पहुँच, सहयोग और आपसी हित के अन्य मुद्दों पर रचनात्मक बातचीत को बढ़ावा मिला।

यह संयुक्त घोषणापत्र ब्रिक्स देशों की उस सामूहिक इच्छाशक्ति और साझा ज़िम्मेदारी का प्रमाण है, जिसके तहत सदस्य देश मज़बूत खाद्य व्यवस्था बनाने, किसानों को सशक्त करने और सभी के लिए एक संवहनीय व समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के कृषि मंत्री, उप-मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए, जिसमें लगभग 100 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

एक अहम पड़ाव के तौर पर, यह ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की पहली ऐसी बैठक थी जिसमें सदस्य देशों और सहयोगी देशों, दोनों को एक साथ लाया गया। मंत्रियों की बातचीत और कई द्विपक्षीय मुलाकातों में हिस्सा लेने के अलावा, प्रतिनिधियों ने इंदौर के मेघदूत गार्डन में वृक्षारोपण कार्यक्रम में भी भाग लिया। यह कार्यक्रम संवहनीयता, जलवायु अनुकूल और आने वाली पीढ़ियों के प्रति ज़िम्मेदारी को बढ़ावा देने के ब्रिक्स देशों के सामूहिक संकल्प को दर्शाता है।

प्रतिनिधियों ने पर्यावरण की संवहनीयता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए,  वृक्षारोपण पहल (ब्रिक्स वाटिका) में भाग लिया। यह जलवायु कार्रवाई और पारिस्थितिक संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को दर्शाता है।