
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावी नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में केवल शीर्ष स्तर पर ही उथल-पुथल नहीं मची है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दशकों पुराना अभेद्य किला ढहता नजर आ रहा है। दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर रेलवे स्टेशन के पास कभी टीएमसी के नीले-सफेद रंग में रंगा ऑटो रिक्शा यूनियन का दफ्तर अब पूरी तरह बदल चुका है। वहां अब भारतीय मजदूर संघ (BMS) का भगवा बैनर लहरा रहा है। यह जमीनी बदलाव साफ संकेत दे रहा है कि बंगाल की राजनीति और व्यवस्था पर हावी टीएमसी के सिंडिकेट राज के अंत की शुरुआत हो चुकी है।
सोनारपुर में 'कट मनी' से मिली राहत, फरार हुए दबंग नेता
सोनारपुर इलाके के ऑटो चालक अब जाकर राहत की सांस ले रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स (The Indian Express) के साथ बातचीत में स्थानीय चालकों ने बताया कि अब उन्हें जबरन गाड़ी चलाने के एवज में स्थानीय टीएमसी नेताओं को 120 रुपये प्रति वाहन की मासिक वसूली यानी 'कट मनी' नहीं देनी पड़ रही है। इसी इलाके से महज 2 किलोमीटर दूर टीएमसी के कद्दावर नेता अभिषेक बनर्जी पर जनता का भारी गुस्सा फूटा था, जहां उग्र भीड़ ने उन पर अंडे और पत्थर बरसाए थे।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कल तक जो नेता और उनके गुंडे धौंस जमाते थे, वे अब नतीजों के बाद से पूरी तरह लापता हैं। वार्ड नंबर 13 की एक स्थानीय सब्जी विक्रेता रूपाली मंडल ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि टीएमसी काउंसलर ने फुटपाथ पर दुकान लगाने के बदले उनसे 20,000 रुपये की भारी रिश्वत मांगी थी। जब उन्होंने पैसे देने से मना किया, तो दबंगों ने उनकी दुकान को पूरी तरह उजाड़ दिया था। रूपाली कहती हैं, "चुनावी नतीजों के बाद से वह काउंसलर फरार है और उसके घर पर ताला लटका है। मैं अब अपनी जगह पर लौट आई हूं और सुरक्षा के लिए भाजपा नेताओं से मदद मांग रही हूं।" इलाके में सरकारी जमीनों पर हो रहे अवैध निर्माण अब पूरी तरह रुक गए हैं और पीड़ित लोग थानों में शिकायतें दर्ज करा रहे हैं।
बेलीघाटा में बाहुबली राजू नस्कर सलाखों के पीछे, अवैध इमारतों पर चला बुल्डोजर
कोलकाता का बेलीघाटा इलाका कभी तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन आज वहां पूरी तरह सन्नाटा पसरा है और टीएमसी के सभी स्थानीय दफ्तर बंद पड़े हैं। राज्य में सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक समीकरण बदलते ही कोलकाता नगर निगम (KMC) ने एक्शन मोड में आते हुए इस इलाके में धड़ल्ले से प्रमोटरों द्वारा बनाई गई अवैध ऊंची इमारतों पर हथौड़ा और बुल्डोजर चलाना शुरू कर दिया है।
इस पूरे निर्माण सिंडिकेट का सबसे बड़ा सरगना और टीएमसी का बाहुबली ठेकेदार राजू नस्कर अब सलाखों के पीछे पहुंच चुका है। कभी एक साधारण टैक्सी ड्राइवर रहे राजू नस्कर ने सिंडिकेट राज के दम पर करोड़ों की अवैध संपत्ति खड़ी की थी, जिसके खिलाफ अब पीड़ित लोग खुलकर जमीन हड़पने (Land Grabbing) की एफआईआर दर्ज करा रहे हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी कड़े शब्दों में साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी में लिप्त किसी भी बाहुबली को बख्शा नहीं जाएगा। मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद अब नगर निगम का पूरा कामकाज सरकारी प्रशासक संभाल रहे हैं और 100 से अधिक अवैध इमारतों को ध्वस्त करने की कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
सरकारी बाढ़ आश्रय गृह से चल रहा था 'रेत माफिया' का काला खेल
कोलकाता से करीब 100 किलोमीटर दूर पूर्व बर्धमान के जमालपुर ब्लॉक से जो तस्वीरें और तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद हैरान करने वाले हैं। यहां ब्लॉक आईएनटीटीयूसी (INTTUC) अध्यक्ष तबरक अली मंडल और उनकी पंचायत प्रधान पत्नी आरिफा को पुलिस ने गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर लिया है। ये दोनों मिलकर एक सरकारी कम्युनिटी सेंटर और बाढ़ पीड़ितों के लिए बने आश्रय गृह (Flood Shelter) पर अवैध रूप से कब्जा जमाए हुए थे और वहीं से दामोदर नदी में अवैध रेत खनन (Illegal Sand Mining) का पूरा सिंडिकेट ऑपरेट कर रहे थे।
ब्लैक मार्केट में बेचे जा रहे थे गरीबों के अधिकार: पुलिस ने जब इन सरकारी भवनों पर छापेमारी की, तो वहां से ग्रामीणों को बांटे जाने वाले सरकारी खाद, बीज, कीटनाशक और सबसे महत्वपूर्ण मनरेगा (MNREGS) के जॉब कार्ड भारी मात्रा में जब्त किए। इन सभी सरकारी सामग्रियों को ब्लैक मार्केट में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था। स्थानीय ग्रामीण शेख मुर्तजा ने बताया, "यहां से हर दिन 150 से 200 ओवरलोडेड ट्रक अवैध रेत लेकर जाते थे, लेकिन खौफ के कारण कोई भी मुंह खोलने की हिम्मत नहीं करता था।" अब जब यह सिंडिकेट जेल के अंदर है, तो ग्रामीणों का डर खत्म हो चुका है और वे 'बांग्लार बाड़ी' जैसी सरकारी आवास योजनाओं में उनसे वसूली गई 'कट मनी' की शिकायतें दर्ज कराने की बड़ी तैयारी कर रहे हैं।
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