
ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर एक ऐसी क्राइम थ्रिलर सीरीज रिलीज हुई है, जिसने देश के इतिहास के सबसे खौफनाक और काले पन्नों को एक बार फिर पलट दिया है। हम बात कर रहे हैं नई वेब सीरीज 'राख' (Raakh) की, जिसने दर्शकों के बीच आते ही तहलका मचा दिया है। यह सीरीज आज से करीब 48 साल पहले यानी साल 1978 में देश की राजधानी दिल्ली को दहला देने वाले मशहूर 'रंगा-बिल्ला' अपहरण और दोहरे हत्याकांड (Ranga-Billa Case) की सच्ची घटना पर आधारित है। 8 एपिसोड की यह मर्डर मिस्ट्री आपके दिलो-दिमाग में एक अनजाना डर और गहरी बेचैनी पैदा करने का दम रखती है। लाइव हिन्दुस्तान की एंटरटेनमेंट एडिटर हर्षिता पांडे की इस विशेष एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड वेब सीरीज रिव्यू रिपोर्ट में जानिए कि क्या आपको अली फजल और सोनाली बेंद्रे की यह सीरीज देखनी चाहिए या नहीं।
क्या है 'राख' की कहानी: एक छोटी सी भूल और कभी घर वापस नहीं लौटे दो मासूम भाई-बहन
सीरीज का प्लॉट साल 1978 के दिल्ली बैकड्रॉप पर सेट है। कहानी की शुरुआत होती है 16 साल की मासूम सुमन अरोड़ा से, जिसे ऑल इंडिया रेडियो पर गाना गाने का एक बड़ा सुनहरा मौका मिलता है। वह बेहद उत्साह के साथ अपने भाई साहिल के साथ घर से रेडियो स्टेशन के लिए निकलती है। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; मंजिल तक जल्दी पहुंचने की जल्दबाजी में दोनों भाई-बहन सड़क पर एक अनजान गाड़ी से लिफ्ट ले लेते हैं। बस, यही एक भूल उनके जीवन का सबसे आखिरी और भयानक फैसला साबित होती है। सुमन और साहिल कभी रेडियो स्टेशन नहीं पहुंच पाते। इसके बाद शुरू होता है एक बेबस मां का अंतहीन इंतजार और दिल्ली पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी तफ्तीश, जिसे मेकर्स ने 8 अलग-अलग एपिसोड्स में बेहद सस्पेंस के साथ पिरोया है।
एपिसोड दर एपिसोड बढ़ता है थ्रिल: जानिए सभी 8 एपिसोड्स की पूरी इनसाइड टाइमलाइन
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एपिसोड 1 (गुमशुदा): सुमन और साहिल के अचानक लापता होने से माता-पिता की दुनिया उजड़ जाती है। इस हाई-प्रोफाइल केस को सुलझाने की जिम्मेदारी तेजतर्रार सब-इंस्पेक्टर जयप्रकाश जाटव (अली फजल) को सौंपी जाती है।
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एपिसोड 2 (गाड़ी की तलाश): जेपी जाटव को उस संदिग्ध कार का सुराग मिलता है जिससे किडनैपिंग को अंजाम दिया गया था। इसी एपिसोड में देश के दो सबसे क्रूर अपराधियों 'बाबू' और 'रज्जो' के खौफनाक चेहरे से पर्दा उठता है।
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एपिसोड 3 (धूमकेतु): पुलिस को एक बहुत बड़ी लीड मिलती है, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते जेपी के हाथ से केस छिनने की नौबत आ जाती है। खुद को साबित करने के लिए जेपी के पास सिर्फ 48 घंटे का वक्त बचता है।
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एपिसोड 4 (राहु-केतु): जांच के दौरान एक और लावारिस लाश मिलने से हड़कंप मच जाता है। जेपी समझ जाता है कि हत्यारे कोई आम अपराधी नहीं बल्कि साइकोपैथ हैं। अब हत्यारों के नाम और चेहरे पुलिस के सामने आ चुके हैं।
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एपिसोड 5 (तिलचट्टा): दोनों शातिर अपराधी पुलिस को चकमा देकर फरार हो चुके हैं। जेपी उनकी पूरी कुंडली खंगालता है, जहां ऐसे राज सामने आते हैं जो रोंगटे खड़े कर देते हैं।
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एपिसोड 6 (दैत्य): मुख्य आरोपी बाबू के बचपन के काले अतीत की परतें खुलती हैं। जेपी सीनियर्स के ऑर्डर्स को दरकिनार कर अपराधियों को किसी भी कीमत पर जिंदा या मुर्दा पकड़ने की कसम खाता है।
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एपिसोड 7 (मटनवाले बाऊजी का बेटा): इस एपिसोड में दिग्गज अभिनेता राकेश बेदी, जेपी (अली फजल) के पिता के रूप में एंट्री लेते हैं। पुलिस और अपराधियों के बीच चूहे-बिल्ली का खेल चरम पर पहुंच जाता है।
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एपिसोड 8 (हम यहीं हैं): यह सीरीज का फिनाले और सबसे शानदार एपिसोड है। जहां शुरुआती 7 एपिसोड्स में केवल तफ्तीश दिखाई गई थी, वहीं इस आखिरी एपिसोड में मेकर्स ने दिखाया है कि असल में उस रात बच्चों के साथ क्या हुआ था। साथ ही एक बेहद भावुक करने वाला 'इफ एंड बट' का एंगल भी दिखाया गया है, जो दर्शकों को रोने पर मजबूर कर देता है।
सोनाली बेंद्रे की सधी हुई एक्टिंग और पुलिस के रोल में अली फजल ने मारी बाजी
एक्टिंग के मोर्चे पर 'राख' एक बेहद मजबूत सीरीज बनकर उभरी है। लंबे समय बाद स्क्रीन पर लौटीं बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे ने एक ऐसी बदनसीब मां का किरदार निभाया है जिसके बच्चों को बेरहमी से मार दिया गया हो। उनके चेहरे का दर्द, सूनी आंखें और रुआंसा कण्ठ दर्शकों को अंदर तक झकझोर कर रख देता है। वहीं दूसरी तरफ, अली फजल ने एक शोषित और अपनी पहचान के लिए लड़ रहे दलित पुलिस अफसर के किरदार में जान फूंक दी है। विभाग के भीतर का जातिगत भेदभाव और समाज में 'मटनवाले बाऊजी का बेटा' कहलाने का उनका दर्द अली फजल ने अपनी शानदार एक्टिंग से पर्दे पर बखूबी उतारा है।
क्या आपको देखनी चाहिए यह सीरीज? जानिए इसकी आईएमडीबी (IMDb) रेटिंग
अनुषा नंदकुमार, संदीप साकेत और 'पाताल लोक' फेम प्रोसित रॉय के शानदार डायरेक्शन में बनी यह सीरीज एक मास्टरपीस कही जा सकती है। सीरीज का बैकग्राउंड म्यूजिक और 70 के दशक की दिल्ली का सेट डिजाइन आपको उसी दौर में वापस ले जाता है। यदि आप डार्क, इंटेंस और रियल-लाइफ क्राइम थ्रिलर देखने के शौकीन हैं, तो 'राख' आपके लिए एक मस्ट-वॉच सीरीज है। रिलीज होते ही इस सीरीज को दर्शकों और क्रिटिक्स की तरफ से शानदार रिस्पॉन्स मिला है, जिसके चलते इसे 7.6/10 की दमदार आईएमडीबी रेटिंग हासिल हुई है। वीकेंड पर देखने के लिए यह एक बेहतरीन और सस्पेंस से भरपूर चॉइस साबित हो सकती है।
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