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जज साहब मुख्यमंत्री विजय नहीं आ सकते कोर्ट.. यह सुनते ही संगीता के वकील ने कोर्ट रूम में जो कहा, उससे उड़ गए सबके होश

हाई-प्रोफाइल वैवाहिक विवादों और कानूनी लड़ाइयों के केंद्र में रहने वाले पारिवारिक न्यायालय (फैमिली कोर्ट) में आज उस समय माहौल बेहद गरमा गया, जब मुख्यमंत्री विजय और उनकी पत्नी संगीता के बीच चल रहे तलाक के मामले की सुनवाई शुरू हुई। पूरे राज्य की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि क्या मुख्यमंत्री आज खुद अदालत के समक्ष पेश होंगे। जैसे ही अदालती कार्यवाही शुरू हुई, मुख्यमंत्री के वकीलों की टीम ने जज के सामने एक अर्जी पेश करते हुए कहा कि 'जज साहब, मुख्यमंत्री विजय अपनी व्यस्त प्रशासनिक व्यस्तताओं और महत्वपूर्ण बैठकों के चलते आज कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकते हैं।' इस दलील के सामने आते ही कोर्ट रूम में सन्नाटा पसर गया, लेकिन इसके तुरंत बाद संगीता के वकील ने जो मोर्चा संभाला, उसने पूरी बहस का रुख ही बदल दिया।

मुख्यमंत्री की गैर-मौजूदगी पर संगीता के वकील का तीखा पलटवार और कानून की दलील मुख्यमंत्री विजय के कोर्ट न आने की बात सुनते ही संगीता के वकील तुरंत अपनी सीट से खड़े हो गए और उन्होंने इस दलील पर कड़ा ऐतराज जताया। संगीता के कानूनी सलाहकार ने जज के सामने दलील देते हुए कहा कि अदालत के भीतर हर नागरिक बराबर है, चाहे वह राज्य का मुख्यमंत्री ही क्यों न हो। वैवाहिक और पारिवारिक विवादों में दोनों पक्षों की उपस्थिति अनिवार्य होती है ताकि काउंसलिंग और समझौते के प्रयासों को आगे बढ़ाया जा सके। संगीता के वकील ने आरोप लगाया कि वीआईपी स्टेटस का हवाला देकर मामले की सुनवाई को जानबूझकर लंबा खींचने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे उनकी मुवक्किल संगीता को मानसिक और कानूनी रूप से प्रताड़ित होना पड़ रहा है।

तलाक के केस में आखिर आज कोर्ट रूम के भीतर क्या-क्या हुआ बंद कमरे में हुई इस तीखी बहस के दौरान दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक कानूनी दांव-पेंच चले। मुख्यमंत्री विजय के कानूनी दल ने तर्क दिया कि कानूनन किसी भी नागरिक को उसकी अनिवार्य प्रशासनिक ड्यूटी के समय व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट पाने का अधिकार है और वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ने को तैयार हैं। वहीं, संगीता के पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि कुछ महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रियाओं और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के लिए व्यक्तिगत उपस्थिति अत्यंत आवश्यक है। कोर्ट रूम के भीतर मौजूद सूत्रों के मुताबिक, संगीता आज खुद अदालत में मौजूद थीं और अपनी बात रखते हुए वह काफी भावुक भी नजर आईं।

जज साहब ने वकीलों की बहस सुनने के बाद क्या फैसला सुनाया और अगली तारीख का सस्पेंस दोनों पक्षों की लंबी और दलीलों से भरी बहस को सुनने के बाद फैमिली कोर्ट के माननीय जज ने इस मामले में बेहद संतुलित लेकिन सख्त रुख अपनाया। जज साहब ने कहा कि न्याय की प्रक्रिया में किसी भी पद या स्टेटस के कारण देरी नहीं की जा सकती। हालांकि, मुख्यमंत्री की आज की अनिवार्य व्यस्तताओं को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उन्हें आज के लिए व्यक्तिगत पेशी से सशर्त छूट दे दी, लेकिन साथ ही एक कड़ी हिदायत भी जारी की है। कोर्ट ने मुख्यमंत्री के वकीलों को आदेश दिया है कि अगली निर्धारित तिथि पर मुख्यमंत्री विजय को हर हाल में अदालत के समक्ष उपस्थित होना होगा ताकि मामले का निपटारा समय पर किया जा सके। इस आदेश के बाद कोर्ट परिसर से बाहर निकलते ही दोनों पक्षों के वकीलों को मीडियाकर्मियों ने घेर लिया, लेकिन दोनों ही पक्षों ने विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।