Thursday , June 25 2026

प्रेग्नेंसी में योग और स्ट्रेचिंग: क्या यह पूरी तरह सुरक्षित है? डॉक्टर से जानें सही नियम और सावधानियां

प्रेग्नेंसी (गर्भावस्था) हर महिला के जीवन का एक बेहद खूबसूरत और खास सफर होता है। इस नौ महीने के दौरान महिला के शरीर में कई तरह के शारीरिक, मानसिक और हॉर्मोनल बदलाव होते हैं। यही वजह है कि इस नाजुक दौर में मां और गर्भ में पल रहे शिशु (भ्रूण) दोनों की सेहत का विशेष ख्याल रखना सबसे ज्यादा जरूरी माना जाता है। सही खानपान, पर्याप्त आराम और तनावमुक्त दिनचर्या के साथ-साथ इस बात को लेकर भी महिलाओं के मन में कई सवाल आते हैं कि क्या इस समय एक्सरसाइज या योग करना सही है? आज के दौर में कई महिलाएं गर्भावस्था के दौरान भी अपनी फिटनेस बनाए रखने और शरीर को एक्टिव रखने की कोशिश करती हैं।

हालांकि, मेडिकल साइंस के अनुसार प्रेग्नेंसी के दौरान हर महिला की स्वास्थ्य स्थिति, शारीरिक बनावट और जरूरतें पूरी तरह अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी भी तरह की शारीरिक एक्टिविटी या फिटनेस रूटीन अपनाने से पहले सही और वैज्ञानिक जानकारी होना बेहद आवश्यक है। यह समझना भी अहम है कि प्रेग्नेंसी के अलग-अलग चरणों (ट्राइमेस्टर) में शरीर की आवश्यकताएं बदलती रहती हैं। बिना सही मेडिकल मार्गदर्शन के कोई भी नई हैवी एक्सरसाइज शुरू करना नुकसानदेह हो सकता है। आइए जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में योग (Yoga) और स्ट्रेचिंग (Stretching) करना कितना सुरक्षित है, और इसे करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

क्या प्रेग्नेंसी में योग और स्ट्रेचिंग करना सुरक्षित है? जानिए ACOG की गाइडलाइन

दुनिया भर में स्त्री रोग के मामलों में सर्वोच्च मानक मानी जाने वाली संस्था अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियंस एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स (ACOG) के अनुसार, जिन गर्भवती महिलाओं को कोई गंभीर मेडिकल कॉम्प्लिकेशन या प्रेग्नेंसी से जुड़ी आंतरिक समस्या नहीं है, वे अपने डॉक्टर की लिखित सलाह के अनुसार नियमित रूप से प्रीनेटल योग (Prenatal Yoga), हल्की स्ट्रेचिंग और अन्य कम या मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक एक्सरसाइज आसानी से कर सकती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान सुरक्षित तरीके से की गई नियमित शारीरिक एक्टिविटी न सिर्फ शरीर को एक्टिव रखती है, बल्कि यह प्रसव (डिलीवरी) के समय होने वाले दर्द को सहने की क्षमता को भी बढ़ाती है।

लेकिन ध्यान रहे कि हर महिला की प्रेगनेंसी का केस पूरी तरह अनोखा होता है। जो आसन एक महिला के लिए सहज है, वह दूसरी के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए किसी भी नए आसन की शुरुआत करने से पहले अपनी गायनिकोलॉजिस्ट से चर्चा जरूर करें। इसके अलावा, जैसे-जैसे गर्भ में शिशु का आकार बढ़ता है, वैसे-वैसे शरीर का संतुलन बदलता है। इसलिए उसी के अनुसार योग के स्टेप्स में भी बदलाव करना चाहिए। यदि किसी भी योगासन या स्ट्रेचिंग के दौरान आपको पेट में हल्का दर्द, चक्कर आना, सांस फूलना, धुंधला दिखना या किसी भी तरह की असहजता महसूस हो, तो उसे उसी सेकंड रोक दें और बिना देरी किए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

प्रेग्नेंसी में योग और स्ट्रेचिंग करते समय इन 5 बातों का रखें विशेष ख्याल

गर्भावस्था के दौरान योग करते समय आपका उद्देश्य वजन घटाना या हैवी फ्लेक्सिबिलिटी हासिल करना नहीं, बल्कि शरीर को रिलैक्स रखना होना चाहिए। अभ्यास के दौरान नीचे लिखी बातों पर विशेष अमल करें:

  • विशेषज्ञ की देखरेख: योग हमेशा एक प्रमाणित प्रीनेटल योग एक्सपर्ट (Prenatal Yoga Expert) की सीधी देखरेख में ही करें। घर पर टीवी या यूट्यूब देखकर जटिल आसन करने की भूल बिल्कुल न करें।

  • पेट पर दबाव से बचें: कोई भी ऐसा आसन, ट्विस्टिंग या स्ट्रेचिंग न करें जिससे आपके पेट (Abdomen) पर सीधा दबाव पड़े या पेट के बल लेटना पड़े।

  • संतुलन का ध्यान: प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में 'रिलैक्सिन' हॉर्मोन बढ़ने से जोड़ ढीले हो जाते हैं, जिससे गिरने या संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा दीवार या कुर्सी का सहारा लेकर ही आसन करें।

  • हाइड्रेशन और आरामदायक कपड़े: योग शुरू करने से पहले और बाद में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। हमेशा ढीले और आरामदायक सूती कपड़े ही पहनें।

  • चेतावनी के संकेत: यदि अभ्यास के दौरान या बाद में आपको ब्लीडिंग (खून बहना), स्पॉटिंग, फ्लूइड लीकेज या पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द महसूस हो, तो तुरंत बेडरेस्ट पर जाएं और डॉक्टर को बुलाएं।

किन महिलाओं को बिना डॉक्टर की अनुमति के योग बिल्कुल नहीं करना चाहिए? (High-Risk Cases)

यदि आपकी प्रेग्नेंसी नीचे दी गई श्रेणियों या चिकित्सकीय स्थितियों के अंतर्गत आती है, तो आपको बिना डॉक्टर की गहन जांच और अनुमति के किसी भी तरह की नई शारीरिक एक्टिविटी या स्ट्रेचिंग शुरू करने की सख्त मनाही होती है:

  • क्रॉनिक बीमारियां: यदि महिला को हाई ब्लड प्रेशर (Pre-eclampsia), दिल से जुड़ी कोई बीमारी (Heart Disease) या गंभीर एनीमिया (खून की भारी कमी) की शिकायत हो।

  • प्रेग्नेंसी के कॉम्प्लिकेशंस: यदि गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में ब्लीडिंग हुई हो, प्लेसेंटा प्रीविया (प्लेसेंटा का नीचे होना) की स्थिति हो या समय से पहले प्रसव (Pre-term Labor) का पुराना इतिहास या खतरा हो।

  • मल्टीपल प्रेग्नेंसी: यदि महिला के गर्भ में जुड़वां (Twins) या उससे अधिक शिशु पल रहे हों।

  • पूर्व मिसकैरेज: जिन महिलाओं का पहले कभी मिसकैरेज (गर्भपात) हुआ हो, उनका केस बेहद संवेदनशील माना जाता है, इसलिए उन्हें शुरुआती महीनों में पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए।