
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार जिला, विकास खंड एवं ग्राम स्तर तक सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण युवा एवं महिलाएं इन योजनाओं का लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें उनकी रुचि एवं स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, जिससे वे रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों का बैंकों से प्रभावी समन्वय स्थापित कराया जाए तथा स्वरोजगार स्थापित करने के लिए उन्हें आवश्यक ऋण उपलब्ध कराने में हरसंभव सहायता प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल कौशल प्रदान करना नहीं, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं एवं महिलाओं को सफल उद्यमी एवं रोजगारयुक्त नागरिक बनाना होना चाहिए।
अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानीय संसाधनों, बाजार की मांग तथा रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। कृषि आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कृषि एवं कृषि से संबंधित गतिविधियों जैसे दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, बागवानी, रेशम उत्पादन, मशरूम उत्पादन, पुष्पकृषि तथा मत्स्य पालन सहित अन्य कृषि आधारित उद्यमों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। उत्पाद आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत ड्रेस डिजाइनिंग, रेक्सिन उत्पाद निर्माण, अगरबत्ती निर्माण, फुटबॉल निर्माण, बैग निर्माण, बेकरी उत्पाद निर्माण, पत्तों से बने पर्यावरण अनुकूल कप एवं प्लेट निर्माण, पुनर्चक्रित कागज निर्माण सहित अनेक लघु उद्योगों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
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