Tuesday , July 7 2026

PoK में गदर की आग पहुंची लंदन: ब्रिटिश सड़कों पर उतरे कश्मीरी, पाकिस्तानी फौज और हुकूमत के खिलाफ खोला मोर्चा

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आटे, बिजली और बुनियादी अधिकारों के लिए लगी गदर की आग अब सात समंदर पार ब्रिटेन की राजधानी लंदन तक पहुंच गई है। पीओके में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों और मानवाधिकारों के हनन के विरोध में लंदन की सड़कों पर भारी संख्या में कश्मीरी समुदाय के लोग उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी दूतावास के बाहर और मध्य लंदन के प्रमुख इलाकों में पाकिस्तानी फौज के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस गंभीर संकट में दखल देने की अपील की।

लंदन में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर भारी आक्रोश, सेना को पीछे हटने की मांग

ब्रिटेन में रह रहे मूल रूप से पीओके के निवासियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर पाकिस्तानी सेना द्वारा निर्दोष नागरिकों पर किए जा रहे बल प्रयोग को रोकने की मांग की गई थी। प्रदर्शन के दौरान "पाकिस्तानी फौज पीओके खाली करो" और "कश्मीरियों को इंसाफ दो" जैसे नारे गूंजते रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस्लामाबाद की सरकार पीओके के प्राकृतिक संसाधनों को लूट रही है और वहां के स्थानीय लोगों को बुनियादी सहूलियतें भी नहीं मिल पा रही हैं।

क्यों भड़की है पीओके में गदर की आग?

दरअसल, पीओके में पिछले लंबे समय से महंगाई, भारी बिजली बिल, आटे की किल्लत और बेरोजगारी को लेकर आम जनता सड़कों पर है। जब स्थानीय लोगों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन शुरू किया, तो पाकिस्तानी रेंजरों और पुलिस ने उन पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसमें कई नागरिकों की जान चली गई। इसी दमनकारी नीति के विरोध में अब दुनिया भर में रह रहे कश्मीरी एकजुट हो रहे हैं और पाकिस्तानी हुकूमत के दोहरे रवैये को वैश्विक मंच पर बेनकाब कर रहे हैं।

वैश्विक मंच पर पाकिस्तान को घेरने की बड़ी तैयारी

लंदन में हुए इस बड़े प्रदर्शन को राजनीतिक विश्लेषक पाकिस्तान के लिए एक बड़ा राजनयिक झटका मान रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने ब्रिटिश सरकार और संयुक्त राष्ट्र (UN) को एक ज्ञापन भी सौंपा है, जिसमें पीओके में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। कश्मीरियों का कहना है कि वे चुप नहीं बैठेंगे और पाकिस्तान के इस दमन चक्र के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे ताकि वहां रह रहे उनके भाई-बहनों को पाकिस्तानी सेना के खौफ से आजादी मिल सके।