
मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) के सुलगते मैदान से इस वक्त एक बेहद खतरनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आ रही है। यमन के आसमान में हूती विद्रोहियों से भरे एक ईरानी विमान की लैंडिंग होने ही वाली थी कि उससे ठीक पहले रणनीतिक ठिकानों पर धुआंधार और भीषण हवाई हमले शुरू हो गए। इस अचानक हुई बमबारी ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि यह कोई आम हमला नहीं है, बल्कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक बेहद गोपनीय और बड़ी रणनीतिक प्लानिंग का हिस्सा है। एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि यह नया चक्रव्यूह मिडल ईस्ट में एक नई और महाविनाशकारी जंग की शुरुआत कर सकता है।
लैंडिंग से ठीक पहले आसमान से बरसी तबाही
सुरक्षा एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय खुफिया सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, हूती लड़ाकों और भारी हथियारों से लैस एक ईरानी विमान यमन के एयरपोर्ट पर उतरने की तैयारी में था। ईरान इस विमान के जरिए हूतियों को बड़ी सैन्य मदद पहुंचाने की फिराक में था। लेकिन जैसे ही यह विमान यमन के एयरस्पेस के करीब पहुंचा, पहले से घात लगाए बैठे लड़ाकू विमानों ने हूती ठिकानों और एयरपोर्ट के रनवे के आसपास धुआंधार बमबारी शुरू कर दी। आसमान से बरसी इस तबाही के बाद ईरानी विमान को मजबूरन अपना रास्ता बदलना पड़ा। इस हैरतअंगेज ऑपरेशन ने ईरान और हूती गठबंधन को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है।
MBS और ट्रंप का सीक्रेट प्लान आया सामने
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सऊदी अरब के ताकतवर नेता मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जुगलबंदी को सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने रेड सी (लाल सागर) और अदन की खाड़ी में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बेहद आक्रामक नीति तैयार की है। ट्रंप और MBS का यह जॉइंट प्लान ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकने और यमन में हूतियों की कमर तोड़ने के लिए बनाया गया है। इस सीक्रेट ऑपरेशन की शुरुआत ने यह साफ कर दिया है कि अब अमेरिका और सऊदी अरब इस क्षेत्र में किसी भी ईरानी दखल को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।
भारत की सुरक्षा और लोकल मार्केट पर पड़ेगा सीधा असर
जियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर भारत की बात करें, तो यमन और रेड सी में बढ़ने वाला कोई भी तनाव नई दिल्ली के लिए बेहद चिंता का विषय है। भारत का एक बहुत बड़ा व्यापारिक हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर यूरोप और अमेरिका जाता है। अगर यहां जंग की स्थिति बनती है, तो मुंबई, गुजरात और अन्य भारतीय बंदरगाहों से जाने वाले जहाजों का किराया और इंश्योरेंस कॉस्ट काफी बढ़ जाएगी। इसके चलते भारत में कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल आने का खतरा पैदा हो जाएगा। यही वजह है कि भारत के नीति निर्माता भी इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद बारीकी से नजर रख रहे हैं।
क्या मिडल ईस्ट में छिड़ने वाली है एक और बड़ी जंग?
आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और ग्लोबल थिंक टैंक के विश्लेषण के अनुसार, इस ताजा हमले के बाद ईरान और हूती गुट की ओर से बड़े पलटवार की आशंका काफी बढ़ गई है। ईरान इस कड़े एक्शन को अपनी संप्रभुता और प्रभाव पर सीधे हमले के रूप में देख रहा है। यदि आने वाले दिनों में हूतियों ने लाल सागर में अमेरिकी या सऊदी अरब के ठिकानों पर मिसाइल दागकर जवाबी कार्रवाई की, तो यह पूरा क्षेत्र एक ऐसे युद्ध की आग में झुलस सकता है जिसे संभालना वैश्विक शक्तियों के लिए भी नामुमकिन हो जाएगा। पूरी दुनिया इस समय सांसें थामकर मिडल ईस्ट के अगले कदम का इंतजार कर रही है।
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