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Nepal Political Crisis: जेन-जी आइकॉन से ‘नेपाली हिटलर’ बनने का सफर? नेपाल के पीएम बालेन शाह पर संसद में बरसे महंथ ठाकुर

नेपाल के राजनीतिक गलियारों में इस वक्त एक नया और बेहद आक्रामक वैचारिक मोड़ देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया और युवा पीढ़ी (Gen-Z) के अभूतपूर्व समर्थन के दम पर पारंपरिक राजनीतिक दलों को पछाड़कर सत्ता के केंद्र में स्थापित हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह (Balen Shah) की शासन शैली अब गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। नेपाल की संसद की उच्च सदन यानी नेशनल असेंबली (National Assembly) में बुधवार 15 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री के खिलाफ विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया। जनता समाजवादी पार्टी (JSP) के कद्दावर नेता और वरिष्ठ सांसद महंथ ठाकुर ने सदन के भीतर प्रधानमंत्री बालेन शाह की तुलना सीधे दुनिया के सबसे क्रूर तानाशाह एडॉल्फ हिटलर से करते हुए देश में तानाशाही शासन व्यवस्था थोपने का गंभीर आरोप मढ़ दिया है।

नेपाली हिटलर बन चुके हैं पीएम: महंथ ठाकुर ने संसद में दागे तीखे सियासी बाण

संसद की रणनीतिक बैठक के दौरान महंथ ठाकुर ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए बालेन शाह के नेतृत्व वाले पूरे प्रशासनिक तंत्र को अक्षम, दिशाहीन और पूरी तरह विफल करार दिया। उन्होंने स्पीकर के सामने जोर देते हुए कहा, "आज हम देश के मुखिया को किस नाम से पुकारें? क्या उन्हें नेपाली तानाशाह कहा जाए या फिर नेपाली हिटलर? वे वास्तव में नेपाल के हिटलर बन चुके हैं। उनके मुंह से निकला हर शब्द परम सत्य मान लिया जाता है और उनका हर मनमाना आदेश देश का कानून बन जाता है। इस निरंकुश रवैये के कारण आज पूरा नेपाल तबाही और प्रशासनिक अराजकता के मुहाने पर जाकर खड़ा हो गया है।" ठाकुर ने आरोप लगाया कि यह सरकार पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है और इसमें जनता को दिए गए लोक-लुभावन आश्वासनों को धरातल पर उतारने की कोई राजनीतिक प्रतिबद्धता नहीं बची है, जिससे देश के युवाओं में हताशा बढ़ रही है।

प्रशासनिक तंत्र और संस्थाओं पर हमला: राजनीतिक दलों के दफ्तरों में तोड़फोड़ का आरोप

विपक्षी नेताओं ने सरकार पर लोकतांत्रिक ढांचे को जानबूझकर ध्वस्त करने का एक बड़ा और संगठित आरोप लगाया है। संसद में दी गई दलीलों के अनुसार, बालेन शाह के प्रशासन ने स्थापित कर्मचारी तंत्र को डराने के लिए अधिकारियों को उनके संवैधानिक पदों से बिना किसी ठोस कानूनी आधार के मनमाने ढंग से हटाना शुरू कर दिया है, जिसके कारण काठमांडू सहित कई हिस्सों में प्रशासनिक स्तर पर भारी विरोध-प्रदर्शन भड़क उठे हैं। यही नहीं, महंथ ठाकुर ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा सत्ता के इशारे पर स्थापित राजनीतिक दलों के प्रांतीय कार्यालयों में जबरन हस्तक्षेप किया जा रहा है, वहां के फर्नीचर सरेआम जलाए जा रहे हैं और लोकतांत्रिक संगठनों को पूरी तरह प्रतिबंधित करने का प्रयास किया जा रहा है क्योंकि यह सरकार संगठित ट्रेड यूनियनों और छात्र संगठनों की वैचारिक ताकत का सामना करने की हिम्मत नहीं रखती।

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में हाहाकार: कठोर नीतियों से निजी क्षेत्र में भारी असंतोष

नेपाल के बुनियादी सामाजिक ढांचे का विशेष उल्लेख करते हुए वरिष्ठ सांसद ने चेतावनी दी कि बोर्डिंग स्कूलों (निजी शिक्षण संस्थानों) और नर्सिंग होम के प्रति सरकार का अत्यधिक आक्रामक और कठोर दृष्टिकोण देश के विकास चक्र को पूरी तरह रोक देगा। उन्होंने तार्किक रूप से स्पष्ट किया कि नेपाल जैसा विकासशील देश अपनी पूरी आबादी को केवल सरकारी सहायता और सीमित बजट के भरोसे विश्वस्तरीय शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं नहीं दे सकता; इसके लिए निजी निवेश और कॉर्पोरेट क्षेत्र का सक्रिय सहयोग अनिवार्य है। सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण लाखों होनहार छात्रों, पेशेवर शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों का भविष्य पूरी तरह से अंधकार में डूबता नजर आ रहा है, जो अंततः देश की आर्थिक रीढ़ को और कमजोर कर देगा।

लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की मांग: गलत दिशा में जा रहा है हिमालयी राष्ट्र

अपने संसदीय संबोधन के समापन सत्र में महंथ ठाकुर ने वैश्विक बिरादरी और देश की न्यायपालिका का ध्यान आकर्षित करते हुए चेतावनी दी कि बालेन शाह की यह स्वेच्छाचारी शासन शैली नेपाल को एक बेहद खतरनाक और आत्मघाती रास्ते पर ले जा रही है। उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को दरकिनार करने और देश की पुरानी सार्वजनिक संस्थाओं को लगातार कमजोर करने की सरकारी नीतियों की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की। इस बड़े संसदीय टकराव के बाद अब काठमांडू की सड़कों पर बालेन शाह के समर्थक युवाओं और पारंपरिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच वैचारिक जंग और तेज होने की संभावना है, जिस पर भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया के राजनयिकों की पैनी नजर बनी हुई है।