
अयोध्या के प्रसिद्ध श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के हाई-प्रोफाइल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 20 जुलाई को एक बेहद अहम और बड़ा आदेश जारी किया है। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) का पुनर्गठन किसी वरिष्ठ IPS अधिकारी की देखरेख में करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मंदिर के दान में हुई चोरी और गबन की जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और पेशेवर मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: तीन जजों की पीठ ने जांच की स्थिति पर उठाए सवाल
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने जांच प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। पीठ ने सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता से पूछा कि वर्तमान में इस गंभीर मामले की जांच की कमान किसके पास है। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को सूचित किया कि मामले की तह तक जाने के लिए शुरुआती स्तर पर SIT का गठन किया गया था और पुलिस लगातार जांच आगे बढ़ा रही है।
सॉलिसिटर जनरल का खुलासा: अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार, जांच रिपोर्ट दाखिल
अदालत में सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि जांच एजेंसी इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है। पुलिस जांच में यह साफ हुआ है कि यह एक संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) है, जिसमें पुलिस बिना वारंट के त्वरित कार्रवाई कर सकती है। तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि पुलिस और जांच एजेंसियों ने अब तक इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और गबन की गई राशि व वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
राजनीति से दूर रखें मामला, 27 जुलाई को होगी SIT पुनर्गठन पर अगली सुनवाई
CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान बेहद सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सीधे-सीधे एक आपराधिक कृत्य का मामला है और इसका किसी भी सूरत में राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। CJI ने दोहराया कि अदालतें राजनीति का स्थान नहीं हैं और न्यायपालिका का एकमात्र लक्ष्य केवल मामले की निष्पक्ष व सही जांच सुनिश्चित कराना है। अदालत के निर्देश पर सॉलिसिटर जनरल ने सहमति जताई कि वरिष्ठ IPS अधिकारी की अध्यक्षता में नई SIT का गठन कर रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किया जाएगा। शीर्ष अदालत अब 27 जुलाई को इस मामले पर अगली सुनवाई करेगी, जहां उत्तर प्रदेश सरकार पुनर्गठित SIT की प्रगति रिपोर्ट सौंपेगी।
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