
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस समय हालात बेहद विस्फोटक और बेकाबू हो चुके हैं। महंगाई, बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी और रोजमर्रा की जरूरी चीजों के लिए त्राहि-त्राहि कर रही स्थानीय जनता का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा है। PoK के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा और उग्र जनआंदोलन माना जा रहा है, जहां आम कश्मीरी रोटी और दाल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करने को मजबूर हैं। आम जनता का आरोप है कि इस्लामाबाद में बैठी शहबाज शरीफ सरकार और सेना के शीर्ष कमांडर इस मानवीय संकट से पूरी तरह आंखें मूंदे हुए हैं और जनता की चीख-पुकार उन तक नहीं पहुंच रही है।
महंगाई और बदहाली से त्रस्त कश्मीरी जनता का फूटा आक्रोश
PoK के विभिन्न शहरों और कस्बों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें भारी भरकम टैक्स, आसमान छूती महंगाई और बिजली-पानी की भारी किल्लत के बीच जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। खाने-पीने की मूलभूत चीजों के दाम इतने बढ़ चुके हैं कि आम आदमी की थाली से दाल और रोटी तक गायब होने की कगार पर आ गई है, जिससे स्थानीय नागरिकों में पाकिस्तान के शासन के प्रति भारी नफरत पैदा हो गई है।
शहबाज-मुनीर की बेरुखी और कुप्रबंधन पर उठे बड़े सवाल
स्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों का साफ तौर पर कहना है कि पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख असीम मुनीर इस गंभीर संकट पर पूरी तरह संवेदनहीन बने हुए हैं। जनता के बुनियादी अधिकारों और कल्याण की अनदेखी कर केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने वाले हुक्मरानों को इस जनआंदोलन की गूंज सुनाई नहीं दे रही है। क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन पाकिस्तान द्वारा बेर्हमी से किए जाने के बावजूद यहां के स्थानीय नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं, जिसके कारण पाकिस्तान के खिलाफ यह बगावत अब एक बड़े जनसैलाब का रूप ले चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर हुआ पाकिस्तान का असली चेहरा
PoK में चल रहे इस अभूतपूर्व आंदोलन ने एक बार फिर पाकिस्तान के कुशासन और मानवाधिकारों के हनन की पोल खोलकर रख दी है। जबरन कब्जाए गए इस क्षेत्र में दशकों से हो रहे आर्थिक शोषण और भेदभाव के खिलाफ जनता का यह खुला विद्रोह पाकिस्तान की नींव हिला रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर के फर्जी आंसू बहाने वाले पाकिस्तानी हुक्मरा अब अपने ही घर में सुलग रही इस आग को बुझाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं, और आने वाले दिनों में यह संकट पाकिस्तान की सत्ता के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन सकता है।
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